35. संसद निरर्हता निवारण विधेयक - Page 44

27

में सदस्यों की नियुक्त करने की अपनी शक्ति का प्रयोग करने की छूट होगी। यह ठीक वही बात होगी जिससे डॉ. अम्बेडकर और हम सभी बचना चाहते हैं। अतः मैं कहता हूँ, यह निश्चित करना सरकार का काम नहीं है कि धारित पद लाभ का है या नहीं। यह विनिश्चिय राष्ट्रपति करेंगे या संसद करेगी।

डॉ. अम्बेडकर : इसीलिए संसद के सामने विधेयक लाया गया है।

पंडित ठाकुर दास भार्गव : सरकार के लिए इस शक्ति को अनधिकार चेष्टा स्वरूप स्वयं अपनाना निश्चित रूप से गलत है। यदि वे यह कहते हैं कि उनके हाथ में राष्ट्रपति है और वे लाभ का मानक नियत कर सकते हैं तो मैं कहता हूँ, वे गलत हैं। कतिपय मामलों में राष्ट्रपति ही निर्वाचन आयोग की सलाह से; यह विनिश्चय करता है कि क्या कोई पद लाभ का पद है या नहीं और अन्य मामलों में संसद विनिश्चिय करती है। मैं नहीं समझता कि वित्त मंत्रालय या सरकार इस मामले को कतई विनिश्चित कर सकती है।

श्री सिधवा : क्या हम इससे सहमत नहीं होंगे कि जो संसद सदस्य के भत्ते की सीमा तक भत्ता मिलता है, वह निरर्हता नहीं मानी जाएगी? इस मामले को सदन तय करे, न कि डॉ. अम्बेडकर।

माननीय उपाध्यक्ष : चर्चा सुनने के बाद इस प्रक्रम पर मैं यह कह सकता हूँ कि इस विधेयक में इस विषय में खंड जोड़ने से हमें कुछ भी नहीं रोकता, अब तक इसमें किसी बात के होते हुए भी, यदि संसद सदस्य किसी समिति में है और उससे अधिक भत्ता नहीं लेता है, जो संसद के सदस्य को मिलता है तो उसे निरर्हित नहीं समझा जाएगा। यह केवल एक सुझाव है। उस दशा में, इस बाबत कोई आपत्ति नहीं होगी कि सरकार सदस्यों को लुभा रही है, क्योंकि 40/- रुपए से अधिक कुछ भी नहीं दिया जाएगा। किंतु कठिनाई यह है कि यदि किसी कर्मचारी को समिति में नियुक्त किया जाता है तो वह भत्ते की भिन्न दर प्राप्त करता रहेगा, संभवतः वेतन के अनुसार, जो वह प्राप्त करता है। किंतु इस मामले पर विचार किया जा सकता है। इसलिए मैं इसे कल तक के लिए स्थगित करने के लिए अनुज्ञात करता हूँ और अब श्री नारायण महथा के संशोधन पर आता हूँं।

श्री कॉमथ : श्रीमान्, पिछले साल इस सदन ने यह फैसला किया था कि राज्य मंत्री और उपमंत्री के पद अनुच्छेद के अधीन निरर्हता की कोटि में नहीं आएंगे। अतः वर्तमान राज्य मंत्री और उप मंत्री निरर्हित नहीं होंगे, किंतु नए संसदीय सचिवों के बारे में क्या होगा?

माननीय उपाध्यक्ष : वे भी अधिनियम में सम्मिलित किए गए हैं।

डॉ. अम्बेडकर : श्रीमान्, आपके इस सुझाव के संदर्भ में कि इसे कल लिया जा