35. संसद निरर्हता निवारण विधेयक - Page 45

28 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

सकता है, मैं यह उल्लेख करना चाहता हूँ कि मेरे लिए उस मामले को लेना संभव नहीं हो सकता, क्योंकि यह मामला कल लिया जाएगा। यह ऐसा मामला है, जिसे मुझे मंत्रालयों को वापिस निर्दिष्ट करना है और वे समय ले सकते हैं। इसलिए यदि यह रखा जाता है तो इसे किसी सुविधाजनक तारीख को लिया जा सकता है।

माननीय उपाध्यक्ष : क्या यह माननीय विधि मंत्री की इच्छा है कि हम अन्य संशोधनों पर विचार करें।

डॉ. अम्बेडकर : संशोधनों को रखा जा सकता है। मैं श्री नारायण महथा के संशोधन को स्वीकार करता हूँ।

श्री एस. एन. महथा (बिहार) : श्रीमान्, मैं यह प्रस्ताव रखता हूँः पृष्ठ 1, पंक्ति

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23 में ‘‘मार्च 1951’’ के पश्चात् निम्नलिखित जोड़ा जाए :

‘‘या 31 मार्च, 1952 को समाप्त होने वाले वर्ष के लिए।’’

श्री सिधवा : किंतु श्रीमान्, हमें इस संशोधन की बिल्कुल कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है। हमें इसे परिचलित नहीं किया गया है।

डॉ. अम्बेडकर : यह बिल्कुल छोटा सा संशोधन है।

श्री सिधवा : विधि मंत्री के अनुसार, यह छोटा हो सकता है किंतु यह बहुत महत्वपूर्ण है।

माननीय उपाध्यक्ष : इसके बाद माननीय सदस्य इसे भी स्थगित कराना चाहते हैं। यह मार्च, 1951 से मार्च, 1952 तक की अवधि का विस्तार करने वाला छोटा-सा संशोधन है।

श्री सिघवा : इस पर भी बाद में संपूर्ण विधेयक के साथ विचार किया जाए।

माननीय उपाध्यक्ष : यह मार्च, 1952 तक अवधि का विस्तार करने वाला साधारण संशोधन है। इस पर किसी भाषण की आवश्यकता नहीं है और मैं इसे सदन के सामने रखूंगा।

संशोधन का प्रस्ताव किया गया :-

पृष्ठ 1, पंक्ति 23 में ‘‘मार्च, 1951’’ के पश्चात् निम्नलिखित जोड़ा जाएः-

‘‘या 31 मार्च 1952 को समाप्त होने वाले वर्ष तक।’’

श्री सिधवा : महोदय, ये स्थानीय सलाहकार समितियाँ रेल स्थायी समिति द्वारा निर्वाचित स्थायी समितियाँ है। अतः मैं यह जानना चाहूँगा कि क्या निरर्हता के दूर करने के लिए प्रत्येक वर्ष इस प्रकार के संशोधन लाए जाएंगे? क्या इस मामले में अधिक विस्तार से विचार करना कुछ प्रतिपादना करना, जिसके अधीन वार्षिक