35. संसद निरर्हता निवारण विधेयक - Page 47

30 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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दूंगा।

माननीय उपाध्यक्ष : यह इतनी कम कर दी गई है ताकि निरर्हता अधिरोपित न

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हो। यह केवल वर्तमान सदस्यों पर लागू है।

प्रश्न यह हैः-

पृष्ठ 1, पंक्ति 23 में, ‘‘मार्च, 1951’’ के बाद निम्नलिखित जोड़ें :-

‘‘या 31 मार्च, 1952 को समाप्त होने वाले वर्ष तक।’’

प्रस्ताव अंगीकृत किया गया।

माननीय उपाध्यक्ष : विधेयक का शेष भाग दूसरे दिन के लिए स्थगित रहेगा,

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जो माननीय विधि मंत्री सदन के सामने इसे लाने के लिए सुविधाजनक समझें।

पंडित कुंजरू : चूंकि माननीय विधि मंत्री को इस मामले पर विचार करने के लिए समय दिया गया है, मुझे आशा है कि वे ठीक फैसले पर पहुंचेंगे।

डॉ. अम्बेडकर : मैं यह कहना चाहता हूँ कि मुझे अपने माननीय मित्र की सलाह पर बहुत निर्भर रहना पड़ेगा।