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माननीय उपाध्यक्ष : अब सदन आगे इस प्रस्ताव पर विचार करने के लिए अग्रसर होगा कि उस राज्य में सम्मिलित क्षेत्र की एक पट्टी को भूटान सरकार को समर्पित करने के परिणामस्वरूप असम राज्य की सीमाओं में परिवर्तन करने के विधेयक पर विचार किया जाए।
विधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर) : मुझे खेद है मैं उस समय सदन में उपस्थित नहीं था जब कुछ सदस्यों द्वारा कोई मुद्दा उठाया गया था कि संसद को इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए इस विधेयक को पारित करने की शक्ति नहीं है कि प्रस्तावित विधेयक यद्यपि परोक्ष रूप से उस क्षेत्र के कुछ भाग को, जो भारत संघ का था, भूटान को समर्पित करने के लिए है। मैंने सुना है कि मेरे माननीय मित्र श्रीप्रकाश ने भी सरकार द्वारा लिए गए आधार के औचित्य में इस मुद्दे पर सदन के समक्ष कुछ निवेदन किए थे। किंतु मुझे यह बताया गया था कि सदन मुझसे इस प्रश्न पर कुछ कहने की प्रत्याशा रखता है।
यह बात बड़ी आसान प्रतीत होती है। मैं सोचता हूँ, मामले को अच्छी तरह समझने के लिए सातवीं अनुसूची में अंतर्विष्ट सूची I का हवाला देकर प्रारंभ करना अच्छा है, जोकि इस संसद की विधायी शक्तियों को परिभाषित करती है। मैं सूची I की प्रविष्टि सं. 14 और प्रविष्टि सं. 15 का निर्देश करना चाहूँगा। प्रविष्टि सं. 14 संधियाँ करने के विषय में है और प्रविष्टि सं. 15 युद्ध और शांति का उल्लेख करती है। उठाया गया प्रश्न ‘‘संधि करने’’ और ‘‘युद्ध तथा शांति’’ शब्दों के निर्वचन पर बहुत अधिक निर्भर करता है। इन मुद्दों में क्या सम्मिलित है? इस मामले पर संयुक्त राज्य (यूनाइटेड स्टेट्स) में सविस्तार चर्चा की गई थी, जब निर्वचन के लिए प्रथम बार प्रश्न उठा था। मामले को संक्षिप्त करते हुए, मैं यह कहना चाहता हूँ कि यूनाइटेड स्टेट्स में यह स्वीकार किया गया था कि संधि करने में क्षेत्र के समर्पण की शक्ति सम्मिलित नहीं होती है। पंडित एम. बी. भार्गव (अजमेर) : क्या कोई प्रतिषेध है?
* संसदीय वाद-विवाद खड-14, भाग- II, 8 अगस्तश् 1951, पृ. 103-118