32 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
डॉ. अम्बेडकर : यदि मेरे मित्र चाहते हैं तो मैं नजीरें उद्धृत करूँगा। मेरे पास ऐसी अनेक नजीरे हैं। मैं सदन को थकाना नहीं चाहता। मैं केवल सारांश दे रहा हूँ।
संधि करने में क्षेत्र का समर्पण सम्मिलित होता है। उसी तरह उस विशिष्ट प्रविष्टि के अलावा, युद्ध और शांति से संबद्ध प्रतिविष्ट में आवश्यक रूप से क्षेत्र का समर्पण सम्मिलित होना चाहिए क्योंकि इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि कभी-कभी उस राज्य के लिए जो एक अन्य विदेशी राज्य से युद्ध कर रहा है, शांति स्थापित करने के लिए शांति की शर्तों में से अपने क्षेत्र के एक भाग का समर्पण करना आवश्यक हो जाता है। मुझे विश्वास है, कि युद्ध और शांति से संबद्ध प्रविष्टि के निर्वचन को चुनौती नहीं दे सकता या इस बात से इनकार नहीं कर सकता कि अब किन्हीं परिस्थितियों में युद्ध और शांति तथा संधि करने से संबद्ध प्रविष्टि में आवश्यक रूप से क्षेत्र का समर्पण सम्मिलित होता है। यह बिल्कुल स्पष्ट है कि इन प्रविष्टियों की अंतर्वस्तु को राज्यक्षेत्र के समर्पण को सम्मिलित किया जाना माना जाए। अतः मात्र इस तथ्य के विरुद्ध कि संविधान के शेष भाग में राज्यक्षेत्र का समर्पण करने के लिए संसद को विशिष्ट शक्ति प्रदŸा करने वाला कोई विशिष्ट अनुच्छेद नहीं है, मेरी दलील यह है कि प्रविष्टियाँ 14 और 15 बिल्कुल पर्याप्त हैं। श्री कॉमथ (मध्य प्रदेश) : नहीं, नहीं।
डॉ. अम्बेडकर : राज्यक्षेत्र का समर्पण करने के लिए संसद को शक्ति सौंपना। मेरे माननीय मित्रों में से कुछ यह कहते हुए अपने सिर हिला रहे हैं कि यह ठीक नहीं है। किंतु यदि फिर भी मैं अपने मत पर कायम हूँ।.............
श्री कॉमथ : हम भी अपने मतों पर कायम हैं।
डॉ. अम्बेडकर : ..........कि जो कुछ मैं निवेदन कर रहा हूँ ऐसा विषय है, जो सभी महान् संविधान के वकीलों द्वारा और यूनाईटेड स्टेट्स की सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी स्वीकार किया गया है।
श्री सिधवा (मध्य प्रदेश) : हमारे उच्चतम न्यायालय के बारे में क्या है?
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर : इसलिए पहली बात जो मैं सदन के सामने रखना चाहता हूँ वह यह है कि जहाँ तक सूची I की प्रविष्टि 14 और 15 का संबंध है, राज्य क्षेत्र के समर्पण के प्रयोजनार्थ संसद को बहुत व्यापक शक्ति प्रदŸा की गई है।
इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि संसद के कुछ सदस्य सहमत प्रतीत नहीं होते या निवेदन को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं जो मैं कर रहा हूँ, मैं इस बात को थोड़े विस्तार से रखना चाहूँगा। माननीय सदस्यों को स्मरण होगा