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कि संयुक्त राज्य का संविधान एक तरह से बहुत कठिन संविधान है। इसका एक साधारण कारण यह है कि संयुक्त राज्य के राज्य उन राज्यों से अधिक स्वतंत्र और प्रभुता संपन्न हैं जितने भारतीय संघ के घटक राज्य इस अर्थ में हैं कि काँग्रेस की शक्तियाँ उन शक्तियों से प्राप्त की जाती हैं जो संयुक्त राज्य गठित करने वाले राज्यों द्वारा उसे प्रत्यायोजित की गई हैं। यह एक ऐसी शक्तियों से सम्पन्न सरकार है जो मात्र प्रत्यायोजित शक्तियों की नहीं कही जाती, अपितु वे प्रगणित शक्तियाँ हैं। संयुक्त राज्य की केंद्रीय सरकार में अवशिष्ट शक्ति जैसी कोई चीज नहीं है जैसी हमारे संविधान में है। इस स्थिति का लाभ उठाते हुए अर्थात् संयुक्त राज्य में राज्य अपने राज्यक्षेत्र के स्वामी होते हैं और जहाँ तक राज्यों के राज्यक्षेत्र का संबंध है, संयुक्त राज्य केंद्रीय सरकार को कोई प्राधिकार नहीं है केवल केंद्रीय सरकार को सौंपे गए कुछ सीमित विषयों के बारे में है। इस विशिष्ट दस्तावेज के निर्वचन में एक चरण था, जिसके अधीन यह दलील दी गई थी कि यद्यपि संयुक्त राज्य सरकार की संधि करने की शक्ति में राज्य क्षेत्र के समर्पण की शक्ति सम्मिलित है, किंतु इसमें ऐसे राज्यक्षेत्र के समर्पण की जो राज्य से संबंध है, शक्ति सम्मिलित नहीं है। दूसरे शब्दों में, संयुक्त राज्य की संधि करने की शक्ति उसके अध्यधीन थी जिसे राज्यों के अंतर्निहित अधिकारों का सिद्धांत कहा जाता था। यह ऐसे अन्य राज्यक्षेत्र को हस्तांतरित कर सकता है जो उसके पास है, जिस पर उसने विजय प्राप्त की है, जो संयुक्त राज्य में संयुक्त राज्य के क्षेत्र के रूप में हैं न कि संयुक्त राज्य के घटक भागों के रूप में। जैसा कि मैंने कहा, यह सिद्धांत संयुक्त राज्य में अनेक वर्षां तक चला था किंतु संयुक्त राज्य की सुप्रीम कोर्ट द्वारा अंततः यह स्थिति अपनाई गई कि संधि करने की शक्ति इतनी असीमित है कि संपूर्ण राज्य भी हस्तांतरित किया जा सकता है और संयुक्त राज्य द्वारा समर्पित किया जा सकता है, यदि यह आवश्यक महसूस किया जाए और युद्ध और शांति की प्रविष्टि के अधीन या संधि करने की प्रविष्टि के अधीन ऐसा किया जा सकता है।
श्री कॉमथ : उस तरह से कौन-सा विशिष्ट राज्य समर्पित किया गया था।
डॉ. अम्बेडकर : मैं आपको नहीं बता सकता किंतु मैं पूरा वाल्यूम और संदर्भ भी
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दे सकता हूँ यह विलोग्बी आन दी कांस्टीट्यूशन ऑफ द यूनाइटेड स्टेट्स’’ में पृष्ठ 572 से जिल्द के अत तक है। मैं सोचता हूँ यह बहुत अधिक नहीं है। यह जिल्द के अध्याय XXXV में हैं और और यहाँ आपको सभी चर्चित बिंदु मिल जाएंगे। और इस पर न्यायमूर्ति स्टोरे की मूल्यवान राय है। मैं सोचता हूँ अधिकांश सदस्य, जो सांविधानिक विधि में रुचि रखते हैं, उसके नाम से परिचित होंगे कि वह संविधानिक विधि पर महत्वपूर्ण आधिकारिक विद्वानों में से एक हैं। यह अध्याय पष्ष्ठ 561 से प्रारंभ होता है किंतु विशिष्ट प्रविष्टियाँ पैरा 311, 312 में और पैरा 317 तक अन्य पैरों में है।