36. असम सीमा परिवर्तन विधेयक - Page 51

34 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

इसलिए, मेरा प्रथम निवेदन यह है कि जहाँ तक कल उठाए गए प्रश्न का संबध है कि संसद को प्राधिकार नहीं है, मेरा यह निवेदन है कि उस प्रश्न का विधि में कोई आधार नहीं है और इस संसद को किसी राज्यक्षेत्र के समर्पण के लिए विस्तृत शक्ति प्राप्त है और राज्यक्षेत्र के समर्पण के परिणामस्वरूप संघ के राज्यों की सीमाओं में समायोजन करने की विस्तृत शक्ति है।

अब आगे विचारार्थ जो प्रश्न उत्पन्न होता है वह यह है कि क्या राष्ट्रपति के लिए संसद के समक्ष इस मामले को लाना आवश्यक है अथवा क्या वह इसे विशुद्धतः अपनी कार्यपालिका की हैसियत में निपटा सकते हैं। इस प्रश्न पर अब मैं प्रासंगिक रूप से यह भी उल्लेख कर सकता हूँ कि वही सिद्धांत इंग्लैंड में प्रचलित है कि राजा क्षेत्र का समर्पण कर सकता है। वास्तव में ऐसा करने के लिए राजा को विशेषाधिकार प्राप्त है।

श्री कॉमथ : कदाचित अलिखित रूप में।

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डॉ. अम्बेडकर : जो भी हो, सिद्धांत है।

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श्री कॉमथ : इंग्लैण्ड का संविधान अलिखित है, यही कठिनाई है।

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डॉ. अम्बेडकर : इससे कुछ फर्क नहीं पड़ता। मैं जानता हूँ मेरे माननीय मित्र

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संविधान के अनुच्छेद 3 का अवलंब ले रहे हैं।

मध्याह्न 2.00 बजे

श्री कॉमथ : अनुच्छेद 2 और 3

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डॉ. अम्बेडकर : मैं उनको बिल्कुल नहीं छू रहा हूँ।

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श्री कॉमथ : उनसे बच रहे हैं।

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डॉ. अम्बेडकर : मैं भिन्न आधार मानता हूँ, क्योंकि मैं यह कहने के लिए तैयार

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हूँ कि इन अनुच्छेदों में राज्यक्षेत्र के समर्पण के लिए कोई निर्देश नहीं है। वे प्रतिषेध नहीं करते, किंतु उनका समर्पण से कुछ लेना देना नहीं है। मैं यह कहने के लिए तैयार हूँ कि इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि मैं संविधान के निर्माण से संबद्ध था और कदाचित अधिकांश सदस्य यह नहीं जानते कि आशय क्या है......

श्री कॉमथ : हम सभी संबद्ध थे।

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डॉ. अम्बेडकर : वे संभवतः यह नहीं जानते कि इन अनुच्छेदों के मूल में क्या

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आशय था। मैं अच्छी तरह जानता हूँ और मैं यह कहने को तैयार हूँ कि यद्यपि यह समर्पण का प्रतिषेध नहीं करता, जैसा मेरे मित्र श्री संथानम द्वारा इंगित किया गया है। इसका प्राथमिक आशय प्रांतों के भाषाई विभाजन के बारे में था। इसीलिए