38 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
डॉ. अम्बेडकर : वह मत वैभिन्न्य है। यदि आप चाहते हैं, तो प्रविष्टियाँ 14 और 15 में संघ राज्यक्षेत्र के लिए कार्यवाही का आधार है।
डॉ. पट्टाभि : तब अनुच्छेद 3 को उद्धृत न करें।
डॉ. अम्बेडकर : अनुच्छेद 3 आनुषंगिक रूप से प्रतिवेदित किया गया है क्योंकि इसमें असम की सीमाओं के पुनर्समायोजन का उल्लेख है।
श्री कॉमथ : क्या यह स्पष्ट है कि विवाद्य विषय समर्पण है न कि सीमा विवाद का समायोजन, जैसा प्रधान मंत्री ने कहा था।
डॉ. अम्बेडकर : राज्यक्षेत्र का समर्पण सीमा विवाद का परिणाम हो सकता है। तब कठिनाई कहाँ है?
श्री कॉमथ : कौन-सा हेतुक है और कौन-सा परिणाम है?.......
डॉ. अम्बेडकर : वह मैं नहीं जानता। प्रशासनिक विभाग आपको बताएगा लेकिन मुझे यहाँ कोई कठिनाई नहीं दिखती।
श्री आर. के. चौधरी (असम) : महोदय, क्या आप यहाँ उपस्थित होने के लिए महान्यायवादी से निवेदन करेंगे। हम उनके विचारों को सुनने के लिए हकदार हैं।
माननीय उपाध्यक्ष : महान्यायवादी आस्ट्रेलिया में हैं। मैं समझता हूँ, महान्यायवादी को सुनने की आवश्यकता नहीं है। सदन ने विधि मंत्री को सुना है। (रुकावट)। आर्डर, आर्डर। माननीय सदस्यों को बोलने के पर्याप्त अवसर थे। अन्य लोगों को भी बोलने का अवसर मिलना चाहिए। मात्र इसलिए कि एक माननीय सदस्य, जिसे बोलने का अधिकार था, ने विशिष्ट प्रतिपादन के पक्ष में विशिष्ट बात कही थी, एक अन्य माननीय सदस्य, जो पहले ही बोल चुका है, फिर से बोलने के लिए अतिरिक्त समय नहीं ले सकता। इसका कोई अन्त नहीं होगा।
श्री शिवचरण लाल (उत्तर प्रदेश) : क्या मैं एक प्रश्न पूछ सकता हूँ।
माननीय उपाध्यक्ष : अब नहीं। डॉ. मुखर्जी।
डॉ. एस. पी. मुखर्जी (पश्चिमी बंगाल) : इस विधेयक पर बोलने के लिए खड़े होते हुए प्रारंभ में मैं यह कहना चाहूँगा कि मैं विधेयक के गुणावगुण पर विस्तार से चर्चा नहीं करना चाहता हूँ। क्या राज्य क्षेत्र का छोटा-सा भूभाग भूटान को दिया जाना चाहिए या नहीं, एक ऐसा प्रश्न है जो कि तत्काल आपके सामने नहीं है। मैं वह जानता हूँ जो कल प्रधानमंत्री ने कहा था, जो सरकार के मामले को मजबूत करता है और इसके विशेष कारण हो सकते हैं, क्यों न उस प्रस्ताव को लागू किया जाए जैसा कि सरकार ने किया है। किंतु मैं उस असाधारण प्रक्रिया के लिए भारी आपत्ति