40 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
डॉ. अम्बेडकर : महोदय नहीं, यह बात बहुत दूर जा रही है। यह जानबूझकर कह रहे हैं कि मैंने गलत उद्धृत किया था और गलत रूप से पेश किया था।
डॉ. एस. पी. मुखर्जी : मैंने यह नहीं कहा है?
डॉ. अम्बेडकर : मैं अपने मित्र श्री कॉमथ को पुस्तक और पृष्ठ के प्रति निर्देश करने के लिए इच्छुक रहा हूँ। मुझे ये बातें पसंद नहीं हैं। मैं आपको बहुत सम्मान देता हूँ- यदि आप इसे नहीं करेंगे तो मुझे भी आपके स्तर पर उतरना पड़ेगा।
डॉ. एस. पी. मुखर्जी : आप अपने स्तर पर उतर गए हैं।
माननीय उपाध्यक्ष : दोनों ही संसद के सम्माननीय सदस्य हैं। पिछले वक्तव्य के बारे में माननीय सदस्य को यह कहने की आवश्यकता नहीं है। विधि मंत्री ने शायद अपनी राय दी हो, किंतु माननीय सदस्य को हमेशा स्वयं सुसंगत निर्णय को पढ़ने का अवसर प्राप्त था। मैं जो कुछ कह सकता हूँ वह यह है कि यथासंभव सदन में उनकी अपनी स्थिति के संगत और स्वयं सदन की स्थिति के अनुरूप उन्हें तर्क का उत्तर तर्क से देना चाहिए। माननीय सदस्यों से मेरी यही अपील है।
डॉ. एस. पी. मुखर्जी : मेरी किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने की इच्छा नहीं है। मैंने कहा था मुझे विधि मंत्री की जल्दबाजी से की गई सिफारिशों को स्वीकार करने में झिझक है।
डॉ. अम्बेडकर : कोई सिफारिश नहीं है। मैंने कहा, ये निर्णय हैं- मैंने पृष्ठ उद्धृत किए हैं।
माननीय उपाध्यक्ष : माननीय सदस्य इस बात से अवगत हैं कि उसी पुस्तक में भिन्न व्यक्ति भिन्न निर्वचन कर सकते हैं। इसलिए माननीय सदस्य डॉ. मुखर्जी को इसे भिन्न रूप से पढ़ने की स्वतंत्रता थी।
डॉ. अम्बेडकर : यदि उनके सामने निर्णय होता और उसे पढ़ने के बाद उन्होंने इसे निर्दिष्ट किया होता तो मैं उसका सम्मान करता। किंतु यह कहना कि मैंने गलत उद्धृत किया है या गलत रूप में पेश किया है बहुत दूर की बात है?
डॉ. एस. पी. मुखर्जी : मैंने कभी गलत उद्धृत करना नहीं कहा।
डॉ. अम्बेडकर : मैं इस तरह की बातों को अनुज्ञात नहीं करूंगा।
डॉ. एस. पी. मुखर्जी : महोदय, जो मुद्दा मैं उठा रहा था, वह यह था। माननीय मंत्री ने कोई निर्णय निर्दिष्ट किया था जिस पर अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट द्वारा विचार किया गया था- उन्होंने निर्णय नहीं पढ़ा था। जहाँ तक अमरीका के निर्णय का संबंध है, यह इस विषय से सुसंगत नहीं है कि जिस पर अब हम यहाँ चर्चा कर