42 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
डॉ. एस. पी. मुखर्जी : श्रीमन्, मैंने सोचा था, जब विधि मंत्री पहले भी बोल रहे थे तब भी वह स्पष्ट कर रहे थे।
माननीय उपाध्यक्ष : क्या माननीय मंत्री यह महसूस करते हैं कि वह किसी विशिष्ट प्रश्न को अब स्पष्ट कर सकते हैं तो वह ऐसा कर सकते हैं। मेरे विचार में प्रक्रिया का अनुसरण किया गया है। राष्ट्रपति ने अपनी मंजूरी दे दी है, संकल्प असम विधानसभा द्वारा पारित कर दिया गया है। राष्ट्रपति की सिफारिश विधेयक के पिछले पृष्ठ पर मुद्रित की गई है।
डॉ. एस. पी. मुखर्जी : मैंने उसे देखा है। किंतु जहाँ तक भारतीय राज्यक्षेत्र के किसी भाग को समर्पण के लिए उपबंध करने का संबंध है, वह व्यावहारिक रूप से अनुच्छेद 1 और 2 के उपबंधों द्वारा आबद्ध है और ऐसी परिस्थितियों में क्या संसद भारतीय राज्यक्षेत्र के किसी भाग के समर्पण करने वाले विधेयक को पारित करने के लिए स्वतंत्र है।
माननीय उपाध्यक्ष : यह एक दूसरा मामला है। यह प्रक्रिया का नहीं है।
डॉ. एस. पी. मुखर्जी : मैं दोनों मामलों का उल्लेख कर रहा हूँ। यह संविधान के अंतर्गत काम करने का प्रश्न है। यदि आप ऐसे मामले पर विचार करना चाहते हैं और आप यह पाते हैं कि आपका संविधान ऐसी अनिश्चित परिस्थिति के लिए उपबंध नहीं करता है तो यह भूल हो सकती है; आपने इसे शायद नज़रअंदाज कर दिया है, किसी भी तरीके से यह किया गया है, जो एक मात्र बात आप कर सकते हैं वह है संविधान का संशोधन और संसद को इसे प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक शक्ति लेनी चाहिए।
जैसा कि मैंने प्रारंभ में कहा था, मैं इस विशिष्ट मामले की बाबत इतना अधिक चिंतित नहीं हूँ। यहाँ पर राज्यक्षेत्र का एक छोटा सा भाग है, जिसको भूटान को दिया जाना प्रस्तावित है। विशेष कारण हो सकते हैं, आपको ऐसा क्यों करना चाहिए। इसके ऐतिहासिक कारण हैं, ऐसे कदम, यदि वह भारत सरकार द्वारा अनुमोदित होता है तो इस देश के लोगों से कदाचित उन लोगों और हमारे बीच अच्छे संबंध हो सकते हैं।
माननीय उपाध्यक्ष : माननीय सदस्य की बहस के पूर्ववर्ती भाग से यह प्रतीत होता है कि वे इस स्थिति को स्वीकार कर रहे हैं कि संधियों से संबंद्ध प्रविष्टि 14 के कारण ऐसी शक्ति है। यह केवल प्रक्रिया का प्रश्न है।
डॉ. एस. पी. मुखर्जी : जो कुछ मैं मानने को तैयार हूँ वह यह है। यदि युद्ध है या दो देशों के बीच संधि की जाती है, या यह विनिश्चित किया जाता है कि हमारे वेतन में एक भाग का समर्पण किया जाना चाहिए या कुछ अन्य भागों को, जो भारत