36. असम सीमा परिवर्तन विधेयक - Page 60

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से बाहर हैं, भारतीय राज्यक्षेत्र में सम्मिलित किया जाना चाहिए तो भारत सरकार के लिए ऐसी संधि करने के लिए कोई वर्जन नहीं है। संपूर्ण प्रश्न है कि इसे किस प्रकार लागू किया जाए और यही बात है जिस पर हम आज चर्चा कर रहे हैं। निश्चित रूप से, मैं प्रस्ताव के गुणावगुण पर नहीं बोल रहा हूँ। जहाँ तक कार्यान्वयन की बात है, वर्तमान संविधान, में ऐसा कुछ नहीं है, जो इस संसद को उस क्षेत्र के किसी भाग का, जो भारत में सम्मिलित है; समर्पण करने के लिए सशक्त बनाता हो। यह विशिष्ट, स्पष्ट और असंदिग्ध है। यदि यह आवश्यक समझा गया था कि यह विशिष्ट कदम उठाया जाना चाहिए, तब मैं यह सुझाव दूँगा कि इस विधेयक को वापिस किया जाना चाहिए, संविधान में आवश्यक संशोधन किया जाना चाहिए ताकि कार्य उचित रूप से तथा सांविधानिक रूप से किया जा सके। इस उदाहरण में अन्तर्वलित क्षेत्र सिद्धांत का प्रश्न बहुत महत्वपूर्ण है और हमें कार्यपालिका से कुछ कम, संसद को भी इस क्षेत्र के समर्पण की शक्ति उस समय तक नहीं देनी चाहिए, जो संविधान के ढांचे में सम्मिलित है जब तक उस बाबत संविधान में विशिष्ट उपबंध न किए जाएं और उनका कड़ाई से पालन न किया जाए। जहाँ तक संसद की शक्तियों का संबंध है, संविधान के बाहर संसद में कोई अवशिष्ट शक्ति निहित नहीं है। यह हमारी पवित्र पुस्तक, बाइबिल, गीता या आप इसे जो कहें आपको इसके भीतर ही सीमित रहना चाहिए। यदि हम पाते हैं कि कोई कमी है जिसे सुधारा जाना है, तो हमें ऐसी रीति से अग्रसर नहीं होना चाहिए जिससे लोगों के किसी वर्ग के मस्तिष्क में भय या अविश्वास की भावना उत्पन्न हो बल्कि हमें पहले संविधान में संशोधन करना चाहिए, इस विधेयक को वापिस लेकर और इसे फिर से उचित रीति से लाया जाना चाहिए।

डॉ. अम्बेडकर : क्या मैं इस बात को स्पष्ट कर सकता हूँ? मुझे ऐसा प्रतीत होता

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है कि डॉ. मुखर्जी की मताभिव्यक्तियों ने इस प्रश्न को बहुत संकीर्ण सीमाओं में बांध दिया है। उन्होंने यह स्वीकार किया है, यदि मैंने उन्हें ठीक से समझा है कि उक्त प्रविष्टियों के अधीन राज्यक्षेत्र के समर्पण की शक्ति है। मुझे विश्वास है, ऐसे मामले की कल्पना करना कठिन है, जहाँ राज्यक्षेत्र का समर्पण, कुछ प्रांतों की सीमा के पुनर्समायोजन में अंतर्वलित नहीं होगा। उस तरह के मामले की कम से कम मैं तो कल्पना नहीं कर सकता। इसलिए प्रश्न प्रक्रिया का है। यदि सातवीं अनुसूची की सूची I या II की किसी प्रविष्टि के अधीन कोई विधि बनाई जानी है तो साधारण प्रक्रिया विधेयक की प्रक्रिया है। क्या ऐसी बात नहीं है? आप एक विधेयक लाइए और इसे प्रक्रमों में सदन में रखा जाए, तब विधेयक पारित किया जाता है और कार्य पूरा हो जाता है। आपको अनुच्छेद 3 के अधीन आने वाले उपबंधों की बाबत निर्धारित की गई आवश्यक प्रक्रिया का अनुसरण करना है। मेरा निवेदन इस प्रकार है कि यह विनिश्चित करने के लिए कि क्या इस मामले में विधेयकों की साधारण प्रक्रिया लागू