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पब्लिक एक ऐसा कर्मचारी है जो कुछ दस्तावेजों से, जो वाणिज्यिक संव्यवहार कहे जाते हैं, उत्पन्न होते हैं, की बाबत कुछ कार्य करता है। भारत में नोटरी पब्लिक की बाबत स्थिति यह है कि परक्राम्य लिखत अधिनियम के अधीन भारत सरकार को उन दस्तावेजों पर जो अधिनियम के अधीन परक्राम्य लिखत हैं, विचार करने के लिए नोटरी पब्लिक नियुक्त करने की शक्ति प्राप्त है। किन्तु अन्य वाणिज्यिक संव्यवहार भी हैं जो कुछ अन्य वाणिज्यिक दस्तावेजों को सृष्ट करते हैं किंतु वे भारतीय परक्राम्य लिखत अधिनियम के अधीन नियुक्त नोटरी पब्लिकों के कार्यक्षेत्रों से बाहर है। वे नोटरी पब्लिक, जो भारतीय परक्राम्य लिखत अधिनियम से बाहर हैं, ग्रेट ब्रिटेन के प्राधिकारियों द्वारा नियुक्त किए जाते हैं।
इस संस्था का इतिहास, संभावतः रोचक है। शुरू में संपूर्ण इंगलैंड में और संभवतः यूरोप में भी नोटरी पब्लिक की नियुक्ति पोप द्वारा की जाती थी। यह एक धार्मिक पद था और उस अधिकारी का काम धार्मिक मामलों पर विचार करना था, अर्थात् यदि किसी विशिष्ट गिरजाघर में बैठने की व्यवस्था के बारे में कोई विवाद उत्पन्न होता था तो उस विवाद को नोटरी पब्लिक द्वारा विनिश्चित किया जाता था। यदि यह प्रश्न उत्पन्न होता था कि क्या वह व्यक्ति, जो मर गया था, सार्वजनिक कब्रिस्तान का हकदार है या उसे गिरजाघर के कुछ अमान्यताप्राप्त भाग में प्राइवेट कब्रिस्तान कहे जाने वाले स्थान में दफनाया जाना है, वह मामला भी नोटरी पब्लिकों द्वारा विनिश्चित किया जाता था। बाद में कुछ वाणिज्यिक कŸार्व्य भी नोटरी पब्लिक को दे दिए गए थे जिनके अधीन वे इन संव्यवहारों के बारे में टिप्पणी लिखने, विरोध करने या तैयार करने या आदर या अनादर अंकित करने से संबंद्ध कŸार्व्यों का निर्वहन करते थे। जब प्रोटस्टेंट (धार्मिक) क्रांति हुई तो ग्रेट ब्रिटेन के संबंध में पोप का प्राधिकार समाप्त हो गया और ब्रिटिश सम्राट द्वारा इसे ग्रहण किया गया तथा ब्रिटिश सम्राट ने वह अधिकारिता, जो उसने नोटरी पब्लिक की नियुक्ति के मामले में पोप से अर्जित की थी, आर्कबिशप, ऑफ केंटरबरी को अंतरित कर दी, जो उसका अधिकारी भी हो गया था, क्योंकि धार्मिक क्रांति के अधीन राज्य गिरजाघर (चर्च) के विरुद्ध सर्वोच्च हो गया था और गिरजाघर के सभी अधिकारी राज्य के अधिकारी हो गए थे। आर्कबिशप ने कोर्ट ऑफ फैकल्टी अधिकारी को जो गिरजाघर के मामलों को देखता था, जिसका मैंने पहले ही कुछ उल्लेख कर दिया है उससे संबद्ध किया था और इंग्लैंड में सभी नोटरी पब्लिक आर्कबिशप ऑफ कैंटरबरी के अधीक्षण के अधीन जो कोर्ट ऑफ फैकल्टी कही जाती थी, द्वारा नियुक्त किए जाते थे। वही निकाय भारत में भी नोटरी पब्लिक को नियुक्त करती रही। हमने केवल यह किया कि हमने इंग्लैंड की कोर्ट ऑफ फैकल्टी के प्राधिकार में से एक छोटा-सा भाग निकाल लिया जिसने परक्राम्य लिखत अधिनियम के संबंध में नोटरी पब्लिकों को