46 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
नियुक्त करने की यह कानूनी अधिकारिता अर्जित कर ली थी।
इसलिए आज भारत में स्थिति यह है कि नोटरियों का एक ग्रुप, जो परक्राम्य लिखत अधिनियम के अधीन दस्तावेजों का कार्य करते हैं, भारत सरकार द्वारा नियुक्त किया जाता है जबकि अन्य सभी दस्तावेज, जो परक्राम्य लिखित अधिनियम के अधीन नहीं आते, उन नोटरियॉं द्वारा व्यवहृत किए जाते हैं जिन्हें इंग्लैंड से नियुक्त किया जाता है। हमारा संविधान अर्थात् इंडिया (कान्सीक्वेंशल प्रोविजन्स) एक्ट, 1949 और संविधान का अनुच्छेद 372 (1) द्वारा अनुज्ञा दी गई कि ऐसा अधिकारी जो संविधान से पहले नियुक्त किया गया था, उस प्राधिकार का प्रयोग करता रहेगा ताकि इस तथ्य के होते हुए भी कि भारत स्वतंत्र हो गया है और इस बात के होते हुए कि इन दो उपबंधों के कारण, जो मैंने उद्धृत किए हैं राष्ट्रपति को नोटरियों की नियुक्तियाँ करने का प्राधिकार है वे व्यक्ति नोटरियों के रूप में काम करते रहें यद्यपि उन्हें भारतीय संविधान के अधीन प्राधिकारी द्वारा नियुक्त नहीं किया गया यह बहुत वांछनीय महसूस किया गया कि ये विसंगति समाप्त की जाए और यह कि नियुक्ति का अधिकार, जो अब कोर्ट ऑफ फैकल्टी के पास है, बंद किया जाए। वह इस विधेयक का मुख्य प्रयोजन है और मैं यह नहीं समझता कि संसद का कोई सदस्य इस पर कोई आपत्ति कर सकता है। दूसरी ओर, मेरा विश्वास है कि संसद के बहुत से सदस्य यह पूछ सकते हैं कि इन अधिकारियों को संविधान के अस्त्तिव में आने के पश्चात् भी काम करने के लिए क्यों अनुज्ञात किया गया। मैं केवल इतना कह सकता हूँ कि कभी न होने से विलंब होना अच्छा है। यही एकमात्र औचित्य है।
विधेयक के मुख्य खंड ये हैं : खंड 3 के अधीन केन्द्रीय सरकार भारत में कहीं पर नोटरी के रूप में कार्य करने के प्राधिकार युक्त नोटरियों को नियुक्त करने के लिए सशक्त है। प्रत्येक राज्य भी अपने क्षेत्राधिकार के भीतर प्रैक्टिस करने के लिए, नोटरियों को नियुक्त करने के लिए सशक्त है।
खण्ड 4 और 5 में कहा गया है कि नोटरी उस समय तक प्रैक्टिस करने के हकदार नहीं होंगे जब तक वे अपना नाम पंजीकृत न करवा लें और प्रैक्टिस करने का प्रमाण-पत्र अभिप्राप्त न कर लें। नियमों के अधीन उससे कुछ शुल्क अदा करना अपेक्षित है। ये शुल्क खंड 14 (2) के प्राधिकार के अधीन विहित है।
खण्ड 6 नोटरियों की सूचियों के वार्षिक प्रकाशन के बारे में है। केंद्रीय सरकार और राज्य सरकारों से उन नोटरियों का रजिस्टर रखना अपेक्षित है, जिन्होंने अपने नाम पंजीकृत कराए हैं।
खण्ड 7 नोटरी की सील (मुहर) से संबंधित है।
खण्ड 8 नोटरी के कृत्यों के बारे में है। यह सामान्य कृत्य हैं, जो एक नोटरी