37. नोटरी विधेयक - Page 65

48 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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* विधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर) : मैं नोटरी की वृत्ति को विनियमित करने के लिए विधेयक को पुरःस्थापित करने की इजाजत के लिए प्रस्ताव करता हूँ।

माननीय अध्यक्ष : प्रश्न यह हैः

‘‘कि नोटरी की वृत्ति को विनियमित करने के विधेयक को पुरःस्थापित करने की इजाजत दी जाए।’’

प्रस्ताव अंगीकार किया गया

डॉ. अम्बेडकर : मैं विधेयक पुरःस्थापित करता हूँ।

** पंडित ठाकुर दास भार्गव : आज के आदेश - पत्र में संशोधन नहीं दिया गया है, किंतु आपकी अनुज्ञा से मैं यह प्रस्ताव करता हूँः-

‘‘कि विधेयक डॉ. बख्शी टेक चंद, डॉ. पंजाबराव शामराव देशमुख, देश बंधु गुप्ता, श्री गोकुल भाई भट्ट, पंडित मुकुट बिहारी लाल भार्गव, श्री प्रभु दयाल हिम्मतसिंगका, श्री अरुण चंद्र गुहा, श्री रोहिणी कुमार चौधरी, श्री बनारसी प्रसाद झुनझुनवाला, श्री आर. के. सिधव, श्री सी. सुब्रह्मण्यम और प्रस्तावक की प्रवर समिति को 31 अगस्त 1951 से पहले रिपोर्ट देने के अनुदेशों के साथ, निर्देशित किया जाए।’’

अब, यह भी एक नई संस्था है। मैं नहीं जानता, शेष प्रांतों या राज्यों में क्या स्थिति है किंतु जहाँ तक मेरी जानकारी है, कदाचित बड़े शहरों को छोड़कर सभी अन्य स्थानों में नोटरी पब्लिक जैसी कोई संस्था नहीं है। मेरे कथन में सुधार किया जा सकता है। वहाँ भी जो कार्य उन्हें सौंपा जाता है वह केवल परक्राम्य लिखत अधिनियम के अधीन होता है।

डॉ. अम्बेडकर : सब नहीं। मूलतः यह केवल परक्राम्य लिखत अधिनियम के अधीन ही था।

पंडित ठाकुर दास भार्गव : क्या उन्हें अन्य शक्तियाँ दी गई हैं।

* संसदीय वाद-विवाद, जिल्द-10, भाग- II, 18 अप्रैल, 1951, पृ. 740

** संसदीय वाद-विवाद, जिल्द-14, भाग- II, 17 अगस्त, 1951, पृ. 836-838