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डॉ. अम्बेडकर : वे नोटरी पब्लिक होंगे, जो परक्राम्य लिखत अधिनियम से बाहर भी नोटरी पब्लिक का कार्य करते रहेंगे।
पंडित ठाकुर दास भार्गव : इस विधेयक के अधीन। किंतु इस समय वे केवल परक्रम्य लिखत अधिनियम के अधीन अपने कŸार्व्यों का निर्वहन करते हैं।
इस विधेयक के परिशालन से मेरा निष्कर्ष है कि वास्तव में अब भारत में बिल्कुल एक नई संस्था को लाना ईप्सित है। इस संस्था का इतिहास बहुत रोचक है; यह प्राचीन इंग्लिश स्टेट्स से उद्भूत हुआ है। मैं यह सब इतिहास नहीं जानता था।...
डॉ. अम्बेडकर : वह इतिहास मैंने ही दिया है।
पंडित ठाकुर दास भार्गव : इंग्लैंड में आर्कबिशप और फिर मास्टर ऑफ फैकल्टीज का निर्देश है, किन्तु यह हमारे लिए अनर्गल वार्तालाप है और हम इसे नहीं समझते। मैंने जो समझा वह यह है। आज संपूर्ण भारत में वकील लिखत निष्पादित करते हैं- विक्रय विलेख, बंधक विलेख, दान विलेख- और यह सब या तो अर्जी नवीशों द्वारा या वकीलों द्वारा किया जाता है। मैं पंजाब के संबंध में प्रमाण के साथ बोल सकता हूँ। वहाँ हर वकील विलेख लिखने के लिए सक्षम है। जहाँ अर्जी नवीश हैं वहाँ वे इस व्यवसाय को करते हैं और वकील सामान्यतः इसे नहीं करते। वे ऐसा करने के लिए विधि द्वारा प्राधिकृत हैं। जहाँ तक ओथ कमिश्नरों का संबंध है, वे उन दस्तावेजों को प्रमाणित करते हैं जो न्यायालय में पेश किए जाते हैं सिविल प्रक्रिया संहिता में कतिपय ऐसे उपबंध हैं जिनके अनुसार शपथ-पत्र प्रमाणित किए जाते हैं और उन्हें न्यायालयों में पेश किया जाता है। इसके अतिरिक्त ऐसी बहुत सी चीजें हैं जिन्हें इन ओथ कमिश्नरों द्वारा प्रमाणित किया जाना होता है और जब कभी कोई व्यक्ति दांडिक मामले में अन्यत्र उपस्थित होने को स्थापित करना चाहता है तो भी इन ओथ कमिश्नरों के प्रमाण-पत्र (एक या दो) दस्तावेज लेने या विशिष्ट तारीख को अनुप्रमाणित करने के प्रयोजन के लिए उपयोग में लाए जाते हैं।
डॉ. अम्बेडकर : मैं नहीं जानता था कि पंजाब में इस प्रकार होता था।
पंडित ठाकुर दास भार्गव : यदि मेरे माननीय मित्र भारत के शेष भाग के बारे में पूछताछ करें तो यह जान कर उनका भ्रम दूर हो जाएगा कि पंजाब इसका अपवाद नहीं है। मैं नहीं जानता इस विधि व्यवसायियों का भविष्य क्या होगा, जिन्हें नोटरी पब्लिक नियुक्त किया जाता है। क्या उन्हें वकालत करने के लिए भी अनुज्ञात किया जाएगा।
श्री सिधवा : वे अब वकालत कर रहे हैं।