37. नोटरी विधेयक - Page 67

50 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

पंडित ठाकुर दास भार्गव : यदि विधेयक के परिकल्पित प्रकार का काम उनको दिया जाना है तो मैं सोचता हूँ कि नोटरी पब्लिक को नियमित कार्यालय रखना चाहिए।

डॉ. अम्बेडकर : उनके हैं। प्रत्येक नोटरी पब्लिक का एक कार्यालय है।

* माननीय अध्यक्ष : क्या मैं सुझाव दे सकता हूँ, यदि आप खंड 8 के उपखण्ड (2) को देखें तो उसमें यह उपबंधित है कि उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट कार्य नोटेरियल कार्य तबके सिवाय नहीं समझा जाएगा जब इसे नोटरी द्वारा अपने हस्ताक्षरों से और कार्यालय की सील लगाकर किया जाएगा। मेरे विचार में इसमें लंबा समय लगेगा कि सर्वोच्च कोटि के साक्ष्यात्मक महत्व का काम हो।

पंडित ठाकुर दास भार्गव : इसका अर्थ है कि जहाँ तक उसकी सील और हस्ताक्षरों का संबंध है वे तैयार किए गए दस्तावेजों को कुछ साक्ष्यात्मक महत्व देते हैं, किंतु यदि आप इस विधेयक को देखें तो सरकार द्वारा नोटरी पब्लिक की नियुक्ति के मामले में कोई प्रतिषेध नहीं है। एक जिले में चौबीस व्यक्ति नियुक्त किए जा सकते हैं। यह अवैतनिक मजिस्ट्रेट की तरह है।

श्री सिधवा : नहीं, उसकी तरह नहीं।

पंडित ठाकुर दास भार्गव : आप अनुभव से बोल रहे हैं; मैं बिना अनुभव के बोल रहा हूँ। मैं वास्तव में जानना चाहता हूँ।

डॉ. अम्बेडकर : आप अज्ञात के डर को व्यक्त कर रहे हैं।

पंडित ठाकुर दास भार्गव : वह बिल्कुल ठीक है। मैं यह नहीं चाहता हूँ कि इस तरह की संस्था जो संपूर्ण भारत में स्थापित की जानी ईप्सित है, यह जाने बिना स्वीकार कर लेनी चाहिए कि यह क्या है। मैं डॉ. अम्बेडकर से निवेदन करता हूँ कि वे प्रवर समिति में इनको स्पष्ट करें।

डॉ. अम्बेडकर : इन बातों को मैं स्वयं सदन में स्पष्ट कर सकता हूँ।

पंडित ठाकुर दास भार्गव : वह एक नई संस्था लाना चाहते हैं, जो इस देश के लिए विदेशी है, जो इतने वर्षों से हमारे यहाँ नहीं थी।

श्री सिधवा : यह नई चीज नहीं है; यह पोत शहरों में विद्यमान है।

पंडित ठाकुर दास भार्गव : यह परक्राम्य लिखतों के लिए है। डॉ. अम्बेडकर ऐसा कहते हैं और उनके कथन को आप से ज्यादा अच्छे रूप में स्वीकार करता हूँं।

* संसदीय वाद-विवाद, खड-14, भाग- II, 17 अगस्त, 1951, पृ. 840-41