37. नोटरी विधेयक - Page 68

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श्री सिधवा : नोटरी पब्लिक आज विद्यमान हैं।

पंडित ठाकुर दास भार्गव : मैंने स्वयं यह निवेदन किया है कि मद्रास, बम्बई और कलकŸा तथा कुछ अन्य स्थानों पर वे विद्यमान हैं।

डॉ. अम्बेडकर : जहाँ कहीं परक्राम्य लिखत अधिनियम लागू है, वहाँ नोटरी पब्लिक हैं। परक्राम्य लिखत अधिनियम सिवाय कुछ भाग ख राज्यों के संपूर्ण भारत में लागू होता है। मैं ऐसी कल्पना करता हूँ। भाग क और भाग ग राज्यों में परक्राम्य लिखत अधिनियम प्रवष्त्त है।

पंडित ठाकुर दास भार्गव : परक्राम्य लिखत अधिनियम की बाबत मेरा कोई झगड़ा नहीं है। मैं जानता हूँ यह संपूर्ण भारत में प्रवृत्त हे। किंतु मैं नहीं जानता कि यह कानून जनता को कैसे प्रभावित करेगा। अवैतनिक मजिस्ट्रेटों या कुछ अन्य व्यक्तियों की व्यवस्था का जो संपूर्ण देश में कुछ कार्य करते थे। यहाँ आप संपूर्ण देश के लिए कुछ करना चाहते हैं, ऐसा कुछ जो बिल्कुल नया है। जहाँ तक संरक्षण का संबंध है, नियुक्ति प्राधिकारी राज्य सरकार और केंद्रीय सरकार होंगी, और इसीलिए ऐसा है। और इसके पश्चात्, कुछ अर्हताएं विहित की गई हैं। किंतु हम नहीं जानते कि ये कार्यालय किस प्रकार कार्य करेंगे। वे दस्तावेज निष्पादित करेंगे। किंतु क्या वे दस्तावेजों की प्रतियाँ रखेंगे। जब तक आप प्रतियाँ रखने का उपबंध नहीं करते वह डर उत्पन्न होगा जो मैं अब व्यक्त कर रहा हूँ। ऐसा नहीं है कि मैं कोई हौवा खड़ा करना चाहता हूँं। भय यथार्थ है। और मुझे विश्वास है कि संपूर्ण देश के वकील इस कानून को पसंद नहीं करेंगे।

डॉ. अम्बेडकर : क्यों नहीं? यह उन्हें एक अनुपूरक व्यवसाय प्रदान करेगा।

पंडित ठाकुर दास भार्गव : अब प्रत्येक वकील दस्तावेजों को निष्पादित करने के लिए सक्षम है और लोग इन दस्तावेजों के निष्पादन के लिए उनके पास जाते हैं। यदि आप इन नोटरियों से दस्तावेजों को निष्पादित करवाएं तो आप उतनी अधिकारिता वकीलों से छीन सकते हैं। यह छोटा मामला नहीं है जो केवल वकीलों के दृष्टिकोण से देखा जाए, आम जनता का क्या होगा? उस व्यक्ति को जिससे दस्तावेज निष्पादित किया जाना अपेक्षित है, उसे बड़े शहर आना होगा और मान लीजिए नोटरी अधिक शुल्क (फीस) लेता है तो उसे उसका भुगतान करना होगा। यहाँ यह नई बात है जो आप पुरःस्थापित कर रहे हैं। कम से कम हमें इसकी संपूर्ण विवक्षा को जानना है। अब ऐसा कानून लाना और इसे पारित करना हमारे लिए ठीक नहीं है। यदि मैं इसे समझता हूँ और मैं इस बाबत आश्वस्त हूँ कि यह लोगों की भलाई के लिए है तो मैं निश्चित रूप से समर्थन करूंगा। किंतु उस समय तब जब तक मुझे विश्वास नहीं हो जाता, मैं कुछ शब्द बोलकर भी उसे नहीं छूडुंगा।