52 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
सबसे पहले हमें यह जानना है कि क्या यह जनता के लिए उपयोगी है या नहीं। माननीय सदस्य के भाषण से मैं अधिक नहीं समझ पाया हूँ।
माननीय अध्यक्ष : क्या माननीय सदस्य अपना स्थान ग्रहण करेंगे अब 6.45 बज चुके हैं और इस प्रस्ताव पर आगे चर्चा कल होगी।
* माननीय उपाध्य : अब हम डॉ. अम्बेडकर द्वारा 9 अगस्त, 1951 को रखे गए निम्नलिखित प्रस्ताव पर विचार करने के लिए अग्रसर होते हैं :-
‘‘कि नोटरी की वष्त्ति को नियमित करने के विधेयक पर विचार किया जाए।’’
पंडित ठाकुरदास भार्गव (पंजाब) : मैंने कल सदन के सामने उस बारे में अनेक कारण रखे थे कि इस विधेयक को प्रवर समिति को क्यों निर्दिष्ट किया जाए। यह सर्वविदित तथ्य है कि कुछ न्यायालयों और बड़े शहरों में.....
विधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर) : क्या सदन का समय बचाने के लिए मैं वक्तव्य दे सकता हूँ?
मेरे मित्र ठाकुरदास भार्गव और मैं विश्वास करते हैं कि डॉ. देशमुख इस विधेयक को प्रवर समिति को निर्दिष्ट कराना चाहते हैं। जहाँ तक मेरे मित्र पंडित ठाकुरदास भार्गव के कल के वक्तव्य का संबंध है, मैं उनके सुझाव को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं था क्योंकि मैंने यह नहीं सोचा था कि उन्होंने कोई सारवान आधार दिए हैं। किंतु जहाँ तक उनके इस अभिवचन का संबंध है कि यह एक अनूठा कानून है और वह उपबंधों की जांच करने के लिए, उसके निहितार्थ आदि को समझने के लिए और अधिक समय चाह सकते हैं, मैं कोरी अनुकंपा के कारण उनके सुझाव को स्वीकार करने के लिए तैयार हूँ।
डॉ. देशमुख (मध्य प्रदेश) : प्रवर समिति के पास निर्देश के लिए प्रस्ताव स्वीकार क्यों न किया जाए?
डॉ. अम्बेडकर : मैं सदन का समय बचाना चाहता हूँ। मैं विधेयक के उबपंधों को स्पष्ट करने के लिए तैयार हूँ यदि उससे वे संतुष्ट हों और वे अपने प्रस्ताव को वापिस ले लें। किंतु मैं सोचता हूँ कि इससे समय नष्ट होगा क्योंकि वह बराबर जोर देंगे। मैं विधेयक को प्रवर समिति को निर्देश करने के लिए प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए तैयार हूँ।
माननीय उपाध्यक्ष : चाहे कुछ भी कारण हों, माननीय मंत्री प्रवर समिति के लिए प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए इच्छुक हैं। इसलिए मैं समझता हूँ आगे अधिक
* संसदीय वाद-विवाद खड-14, भाग- II, 18 अगस्त, 1951, पृ. 853-55