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चर्चा करने की जरूरत नहीं है।
पंडित ठाकुरदास भार्गव : जहाँ तक अनुकंपा के प्रश्न का सबंध है....
माननीय उपाध्यक्ष : अनुकंपा का कोई प्रश्न नहीं है।
पंडित ठाकुरदास भार्गव : तो क्या यह आवेश है? मैं केवल यह निवेदन करूंगा कि दिए गए कारण इतने अकाट्य हैं कि उन्होंने डॉ. अम्बेडकर को भी प्रवर समिति को निर्देश करने के लिए स्वीकार करने हेतु हिला दिया है। मुझे अन्य लोगों की भांति सदन के समय के महत्व का अधिक ध्यान है; किंतु मैं यह इंगित करना चाहूँगा कि इस मामले के बारे में जानकारी के अभाव के लिए मैं अकेला ही नहीं हूँ। अनेक लोग हैं जो इस विषय की अधिक जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं।
डॉ. अम्बेडकर : इसमें ऐसा कोई आकर्षण नहीं है।
पंडित ठाकुरदास भार्गव : इसमें कोई आकर्षण नहीं हो सकता, किंतु साथ ही हमारा इस बारे में अवश्य समाधान होना चाहिए कि वास्तव में इस कानून की आवश्यकता है। मेरे इस प्रस्ताव को स्वीकार करने के लिए मैं डॉ. अम्बेडकर का आभारी हूँ, यद्यपि उन कारणों से, जो उनके अनुसार अन्य अनेक बातों पर आधारित हैं। किंतु मेरे अनुसार यह स्वीकार किया गया था, क्योंकि तर्क बहुत विश्वासप्रद है।
डॉ. अम्बेडकर : मैं माननीय सदस्य से केवल यह अनुरोध करूंगा कि तारीख 5 सितंबर के बाद किसी दिन की रख लें क्योंकि मैं दो या तीन दिन बाहर रहूँगा।
पंडित ठाकुरदास भार्गव : माननीय मंत्री को उपयुक्त कोई भी तारीख, मैं स्वीकार करने के लिए इच्छुक हूँ।
डॉ. देशमुख : महोदय..................
डॉ. अम्बेडकर : अब कोई भाषण किसलिए?
माननीय उपाध्यक्ष : यह तकनीकी किस्म का विषय है और अच्छा है कि यह सीधे प्रवर समिति को जाए।
डॉ. देशमुख : किंतु मैं प्रस्ताव का नोटिस देता हूँ और मैं दो मिनट से अधिक समय नहीं लूंगा।
माननीय उपाध्यक्ष : क्या हम तारीख रखेंगे जैसे.....
डॉ. अम्बेडकर : मैं 7 सितंबर का सुझाव देता हूँ।
माननीय उपाध्यक्ष : संशोधन रखा गया है :
‘‘कि विधेयक डॉ. बक्शी टेकचंद, डॉ. पंजाब राव शामराव देशमुख, श्री देशबंधु