38. अखिल भारतीय बार की आवश्यकता - Page 72

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अखिल भारतीय बार की आवश्यकता विषयक संकल्प

श्री श्यामनंदन सहाय (बिहार) : महोदय, क्या मुझे निवेदन करने की इजाजत है? अगला संकल्प पंडित एम. बी. भार्गव के नाम में हैं किंतु एक अन्य प्रस्ताव मेरे नाम में हैं- मैं पांच मिनट से अधिक समय नहीं लूँगा.................. कुछ माननीय सदस्य : नहीं, नहीं।

श्री श्यामनंदन सहाय (बिहार) : ....और मेरे विचार में माननीय मंत्री भी संभवतः पांच मिनट से अधिक समय नहीं लेंगे। इसलिए हम इसे पहले लेकर निपटा सकते हैं।

विधि मंत्री (डॉ. अम्बेडकर) : मैं इस प्रस्ताव को एक मिनट में निपटा सकता हूँ जो आप नहीं कर सकते हैं।

माननीय उपाध्यक्ष : विचार करना सदन का काम है। माननीय मंत्री यह कहना चाहते हैं कि संकल्प के सारवान भाग को प्रभावी किया गया है। संकल्प पहले की वरीयता में अगला है। किसी भी और से मात्र कथन करने की अपेक्षा इसके बारे में कुछ नहीं किया जाना है।

डॉ. अम्बेडकर : दूसरे संकल्प की बाबत मेरी वही स्थिति है। मैंने समिति नियुक्त करने के लिए व्यावहारिक कदम उठाए हैं और मैं अपने माननीय मित्र को यह बताने जा रहा था कि इस मामले में चर्चा करने से सदन और उनका समय नष्ट होगा। यदि मुझे वक्तव्य देने की इजाजत दी जाए। मैं सोचता हूँ उन्हें बिल्कुल कुछ भी कहने की आवश्यकता नहीं है, वह केवल यह कह सकते हैं, ‘‘मैं प्रस्ताव करता हूँ।’’

माननीय उपाध्यक्ष : हाँ, पंडित एम. बी. भार्गव औपचारिक रूप से अपने संकल्प का प्रस्ताव कर सकते हैं।

पंडित ठाकुरदास भार्गव (अजमेर) : मैं सविनय प्रस्ताव करता हूँ-

‘‘इस सदन की राय है कि लोकहित में और विधिक वृत्ति के हित में अखिल भारतीय आधार पर एक स्वतंत्र और स्वायत्त बार की आवश्यकता है और यह कि