38. अखिल भारतीय बार की आवश्यकता - Page 75

58 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अनुरोध करुॅंगा ताकि रिपोर्ट प्राप्त होने और उस पर विचार करने के पश्चात् संसद के समक्ष विचारार्थ विधान का प्रश्न लाया जाए। मुझे आशा है, मेरे माननीय मित्र इससे संतुष्ट होंगे और वे संकल्प को वापिस ले लेंगे।

श्री सिधवा (मध्य प्रदेश) : मैं संसद के तीन सदस्यों का सुझाव देता हूँ जिन्हें न्यायिक ज्ञान है।

डॉ. अम्बेडकर : यदि वह चाहें तो मैं श्री सिधवा को सम्मिलित करने के लिए तैयार हूँ। उन्हें एक गैर विधिक सदस्य भी लेना चाहिए क्योंकि वह सामान्य विवेक दे पाएगा।

पंडित एम. बी. भार्गव : क्या इस समिति को इन बार कौंसिलों की शक्तियों, कृत्यों और उनके गठन तथा उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों से उनके परस्पर संबां को निर्दिष्ट करने की स्वतंत्रता होगी? डॉ. अम्बेडकर : जी हाँ।

पंडित एम. बी. भार्गव : क्या मैं जान सकता हूँ कि क्या इन कौंसिलों में अनुशासनिक अधिकारिता निहित होगी या केवल उच्च न्यायालयों में निहत होगी।

डॉ. अम्बेडकर : जिन्हें मैं विशेष समस्याएं समझता हूँ, जो इस समय कठिनाई उत्पन्न करती हैं, उन्हें मैं पहले ही सदन के समक्ष रख चुका हूँ। आनुषंगिक प्रश्नों पर निस्संदेह विचार किया जाएगा।

माननीय उपाध्यक्ष : मुझे विश्वास है एक अनौपचारिक समिति बैठी थी जिसने इस प्रश्न पर विचार करने हेतु माननीय मंत्री से कुछ सिफारिश की थी।

डॉ. अम्बेडकर : मुझे याद नहीं है। हो सकता है ऐसा हो।

माननीय उपाध्यक्ष : माननीय मंत्री द्वारा किए गए कथन को ध्यान में रखते हुए मैं नहीं समझता कि संकल्प पर जोर दिया जाए। क्या सदन की इजाजत से प्रस्तावक अपना संकल्प वापिस ले सकते हैं?

संकल्प इजाजत से वापिस लिया गया।

माननीय उपाध्यक्ष : संशोधन स्वतः ही समाप्त हो गए। अगला संकल्प।

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