60 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
है वह यह है कि क्या अनुच्छेद 101 और 102 निःशेषी हैं अथवा क्या संविधान में कोई दूसरा ऐसा अनुच्छेद है जो स्वतंत्र रूप से लागू हो सकता है यद्यपि मामला अनुच्छेद 101 और 102 के अंतर्गत नहीं आता हो। मेरा निवेदन है कि अनुच्छेद 105 (3) सीट को खाली कराने की बाबत संसद को दी गई अतिरिक्त शक्ति है और यह अनुच्छेद 101 और 102 में अंतर्विष्ट किसी बात से समाप्त नहीं होती।
यह ऐसा मामला है जिसमें सदस्य ने विशेषाधिकार भंग किया है और सदन अपने आप इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि विशेषाधिकार भंग किया गया है और मामला इतना गंभीर है कि निष्कासन का आदेश दिया जा सकता है तो सदन अनुच्छेद 105 (3) के अधीन निष्कासन का आदेश दे सकता है। अनुच्छेद 105 (3) में उल्लिखित होने के कारण सदन ऐसा करने के लिए सक्षम है जिसमें यह उल्लेख किया गया है कि संसद की शक्तियाँ आदि हाउस ऑफ कामन्स की शक्तियों जैसी होगी और मेज़ पार्लियामेन्टरी प्रैक्टिस के प्रति निर्देश से मेरे विचार में यह दर्शित होगा कि निष्कासन हाउस ऑफ कॉमन्स की शक्तियों में से एक है, उन शक्तियों में से एक शक्ति यह है, जो रखती है वह है विशेषाधिकार के भंग के लिए दंडित करना। इसलिए निष्कासन का आदेश देकर सीट खाली कराने की शक्ति अनुच्छेद 105 (3) के अधीन है और वह अनुच्छेद 101 और 102 में अंतर्विष्ट उपबंधों द्वारा किसी भी रूप में निराकृत नहीं होती। एकमात्र प्रश्न जो विचारार्थ उत्पन्न होता है वह है कि क्या संसद के विशिष्ट आदेश द्वारा अनुच्छेद 105 के उपबंधों के अधीन माननीय सदस्य के विरूद्ध पहले ही प्रारंभ की गई कार्यवाहियाँ समाप्त हो जाएंगी, यदि सदस्य अनुच्छेद 101 के उपबंधों के अधीन अपना त्याग-पत्र देना चाहता है। मेरा विनम्र निवेदन यह है कि माननीय सदस्य अनुच्छेद 101 का रास्ता अपनाकर अनुच्छेद 105 के अधीन कार्यवाहियों को बंद नहीं करवा सकता। ये कार्यवाहियाँ इस तथ्य के होते हुए भी अवश्य जारी रहनी चाहिए कि माननीय सदस्य ने अनुच्छेद 101 के अधीन अपना त्याग-पत्र दे दिया है, और वास्तव में अपनी कार्यवाहियों द्वारा संसद के लिए उसको सीधे ही दंड देना संभव नहीं है। इसलिए माननीय सदस्य के त्याग-पत्र के होते हुए भी संसद को उन कार्यवाहियों को आगे चलाने की स्वतंत्रता है जो कि पहले ही अनुच्छेद 105 के अधीन प्रारंभ की जा चुकी हैं।
श्री संथानम : जो कुछ विधि मंत्री ने कहा है, मैं उसमें एक शब्द और जोडूंगा।
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‘‘त्याग-पत्र’’ शब्द का एकमात्र अर्थ यह है कि त्याग-पत्र के प्रभावी होने से पूर्व इस संबद्ध प्राधिकारी द्वारा औपचारिक रूप में अधिसूचित किया जाना चाहिए। अन्यथा सभी प्रकार की जटिलताएं उत्पन्न होंगी। मान लीजिए, आपके घर में कोई पत्र दिया जाता है, और आप वहाँ नहीं हैं। और आप बाद में चार दिन बाद आते हैं। क्या इससे