66 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
गए त्याग-पत्र को लागू करने के लिए उसमें अंतर्विष्ट उपबंधों को लागू करने के लिए अध्यक्ष अनुज्ञात नहीं होंगे।
इसलिए आवेदन को उसके किसी शब्द को निकाले बिना उसी रूप में लेना चाहिए तथा मेरा निवेदन यह है कि आवेदन त्याग-पत्र का आवेदन नहीं समझा जाना चाहिए (व्यवधान)। पंडित कुंजरू (उत्तर प्रदेश) : व्यवस्था के प्रश्न पर।
डॉ. अम्बेडकर : मैंने समाप्त नहीं किया है।
माननीय उपाध्यक्ष : वे व्यवस्था का प्रश्न उठा रहे हैं। हमें पहले उन्हें सुनना चाहिए।
पंडित कुंजरू : महोदय कल आपने व्यवस्था दी थी कि आपकी अंतिम राय यह है कि त्याग-पत्र प्रभावी हो गया था। क्या अब उस प्रश्न पर चर्चा की स्वतंत्रता है।
डॉ. अम्बेडकर : मैं नहीं जानता।
पंडित कुंजरू : उपाध्यक्ष महोदय ने कल ऐसा कहा था।
डॉ. अम्बेडकर : जहाँ तक मुझे याद है, यह अंतिम नहीं था।
पंडित मैत्रा (पश्चिमी बंगाल) : महोदय, आपने कल यह कहा था कि प्रस्ताव का प्रभावी भाग आस्थगित रखा जाए। यह आपका विनिर्णय था और यह वह सब था जो आपने कहा था। मेरे द्वारा उठाया गया प्रश्न यह था कि क्या ज्योंही श्री मुद्गल का त्याग-पत्र आया और आपको दिया गया त्यों ही उसने सदन में अपनी सीट खाली कर दी थी या नहीं? उठाया गया यह मुख्य प्रश्न था और पंडित कुंजरू की बात से जो समझ आता है पहले आपकी भी यह राय थी कि त्याग-पत्र प्रभावी हो गया था।
डॉ. अम्बेडकर : उसने कहा था विचार के अध्यधीन।
पंडित कुंजरू : मैं सोचता हूँ कि अभिलेख इसे दर्शाएगा।
गृह मंत्री (श्री राजगोपालचारी) : महोदय, मैं सोचता हूँ और अभिलेख इस बात को दर्शाएगा कि आपने निश्चित रूप से यह कहा था कि विचार करने के लिए आप समय लेंगे।
पंडित कुंजरू : फिर भी प्रश्न यह है कि आपको यह विचार करना था कि प्रधानमंत्री द्वारा लाए गए प्रस्ताव पर बिना किसी संशोधन के सदन में विचार किया जा सकता है या कोई संशोधन लाया जाना चाहिए और इसमें आगे क्या कार्यवाही की जा सकती है। किंतु जहाँ तक स्वयं त्याग-पत्र का संबंध है, आपने अनुच्छेद 101 की ओर ध्यान आकर्षित किया था और यह कहा था कि आपके मस्तिष्क में इस