39. संसद सदस्य का आचरण विषयक संकल्प - Page 84

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बाबत कोई संदेह नहीं है कि त्याग-पत्र अंतिम था और प्रभावी हो गया था। एक माननीय सदस्य : नहीं महोदय।

माननीय उपाध्यक्ष : मैं अभिलेख से पढूँगा। यही हुआ था।

माननीय उपाध्यक्ष : मैंने काफी सुन लिया मैंने सदन को पहले ही बता दिया है कि जहाँ तक प्रभावी भाग का संबंध है, क्या कार्यवाही की जानी है जिस पर फुर्सत से चिर किया जाना चाहिए। मैं उस मामले पर विचार करूंगा। जैसा कि मैंने ‘में महोदय’ कृत पार्लियामेंटरी प्रैक्टिस के उस भाग को पहले ही निर्दिष्ट किया था, किसी सदस्य का निष्कासन या उसका निलंबन एक अतिरिक्त उपचार है क्योंकि वह संसद का सदस्य है। कोई भी सदन के अंदर या बाहर सदन का अवमान कर सकता है। मात्र इसलिए, कि वह सदस्य है, अन्य व्यक्ति की अपेक्षा उस पर हमारी अधिक अधिकारिता है। जहाँ तक अन्य व्यक्ति का संबंध है, वह बाहर का है, उन्हीं परिस्थितियों में हम उसको निष्कासित या निलंबित नहीं कर सकते क्योंकि वह सदस्य नहीं है। अतः इसके साथ क्या कोई सदस्य है या बाहर का है, सदन का अवमान कर सकता है। जहाँ तक उपचार का संबंध है वह केवल यह है कि परिवर्तित परिस्थितियों में उस उपचार में भी परिवर्तन किया जाना चाहिए। किंतु हम इस प्रस्ताव को हाथ में लेने की स्थिति से मुक्त नहीं हैं क्योंकि वह पहले ही पेश किया जा चुका है। जब वह शुरू में बिल्कुल ठीक था तो मैं नहीं समझता कि एकपक्षीय त्याग-पत्र या सदन से हटने से सभी आगामी कार्यवाहियाँ समाप्त की जा सकती हैं।

दूसरे मामले के बारे में मैं फुर्सत से विचार करूंगा। जो कोई अब बोलना चाहते हैं, वे यह धारणा न रखें कि मैं सुनूंगा नहीं। वह सदन के पटल पर नहीं है जो मैं उसे सुनूँ। वह मुझे अपनी राय संसूचित कर सकता है।

पंडित मैत्रा : किस पर? गुणागुण में हमारी रुचि नहीं है।

माननीय उपाध्यक्ष : सभी मामले; जब त्याग-पत्र प्रभावी होता है, मात्र इसलिए कि सदस्य ने त्याग-पत्र दिया है, जब उसका आचरण सदन के समक्ष लाया गया है। तो क्या मात्र उसके त्याग-पत्र से सदन की अधिकारिता खत्म हो जाती है- विशेषकर तब जब वह उन व्यक्तियों पर भी अधिकारिता रखता है जो इस सदन के सदस्य नहीं है, यदि वे सदन का अवमान करते हैं। वह प्रश्न है जो माननीय सदस्यों को नोट करना हैं। यदि कोई व्यक्ति सदन से बाहर सदन का अवमान करता है तो त्याग-पत्र का प्रश्न नहीं है। सदन फिर भी अपने आपको बेकार नहीं मानेगा और उसके विरुद्ध अग्रसर होगा। क्या मात्र त्याग पत्र से स्थिति बदल जाती है। यह ऐसी स्थिति है जिस पर हमें विचार करना है। इस समय मैं नहीं समझता कि स्थिति बदल गई है सिवाय उपचार संबंधी भाग के और वह है कि कौन-सा उपचार लागू किया जाना है।