39. संसद सदस्य का आचरण विषयक संकल्प - Page 85

68 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

* ख़्वाजा इनायतुल्ला (बिहार) : क्या श्री मुद्गल अब सदन के सदस्य हैं या नहीं?

;r Yq y

माननीय उपाध्यक्ष : वास्तव में यही बात हम विनिश्चित कर रहे हैं। मेरा मत है

kè; {k

कि वह अब सदस्य नहीं है। मैं यह दर्शाने के लिए कोई भी तर्क सुनने को तैयार हूँ कि वह सदस्य बने हुए है। और इसीलिए प्रभावी भाग भी ठीक है।

जहाँ तक पूर्ववर्ती भाग का संबंध है, मैंने इसके विपरीत कोई नज़ीर नहीं देखी है कि एक बार जब सदन के हाथ में अवमान का मामला है तो दूसरे व्यक्तियों की मात्र एकपक्षीय कार्यवाही से उसकी (सदन की) अधिकारिता समाप्त हो जाएगी। जहाँ तक प्रभावी भाग का संबंध है, यदि उसने पहले ही त्याग-पत्र दे दिया है तो निष्कासन का प्रश्न नहीं है। यदि उसने त्याग-पत्र नहीं दिया है, तो निष्कासन का प्रश्न आता है। इसलिए यह एक संकीर्ण प्रश्न है कि इस सदन द्वारा प्रभावी भाग कैसे पारित किया जा सकता है। मैं विधि मंत्री को और किसी भी अन्य माननीय सदस्य को सुनना चाहूँगा जो इस मामले में बोलना चाहेंगे।

डॉ. अम्बेडकर : महोदय, अब तक मैंने निवेदन किया है कि कतिपय अंशों को निकालने से त्याग-पत्र विधिमान्य नहीं हो जाएगा, क्योंकि नियम 176-क के अधीन निकालने की शक्ति केवल कार्यवाहियों तथा चर्चा तक सीमित है। त्याग-पत्र चर्चा और कार्यवाहियों का भाग नहीं है।

मेरा दूसरा निवेदन बिल्कुल भिन्न किस्म का है और वह यह है। जब त्याग-पत्र के औचित्य के बारे में प्रश्न उद्भूत होता है तो उसका विनिश्चय करने के लिए कौन प्राधिकारी है? मेरा निवेदन है कि जब कोई ऐसा प्रश्न पैदा होता है तो इसे विनिश्चित करने वाला प्राधिकारी स्वयं सदन है। महोदय, आप मुझे इस भाषण को निर्दिष्ट करने की अनुज्ञा देंगे जो मैंने श्री कॉमथ द्वारा लाए गए संशोधन पर इसी प्रश्न के बारे में संविधान सभा में दिया था। मैंने कहा था कि वास्तव में त्याग-पत्र संसद को प्रस्तुत किया जाता है क्योंकि त्याग-पत्र का प्रयोजन उस निकाय से अपने आपको अलग करना है, अर्थात्, संसद से, जिसके लिए उसे चुना गया था। अध्यक्ष या उपाध्यक्ष सदन के संसूचना के माध्यम मात्र हैं। चर्चा के दौरान मैंने यह कहा था कि यद्यपि सैद्धांतिक रूप से त्याग-पत्र संसद कहे जाने वाले लोगों के एक सामूहिक निकाय के लिए है, किसी सदस्य के लिए, जो त्याग-पत्र देना चाहता है, सदन के 292 या 295 सदस्यों को अपना त्याग-पत्र भेजना बिल्कुल असंभव है। इसलिए जहाँ तक इसका संबंध है कि वह संप्रेषण माध्यम से अपनी इच्छाओं को संसूचित कर रहा है वह संसद से अपने आपको अलग करना चाहता है, उस हद तक अध्यक्ष ऐसा व्यक्ति है जिसको त्याग-पत्र प्रस्तुत किया जाना है। किंतु यदि

* संसदीय वाद-विवाद, खड-14, भाग- II, 25 सितंबर, 1951, पृ. 3277-79