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में कुछ संशोधन के लिए प्रस्ताव लाना था किंतु मैं एक अन्य समिति में कार्यरत था इसलिए सदन में उपस्थित नहीं हो सका और उसके लिए मैंने आप की अनुज्ञा ले ली थी। चूंकि मैं समझता हूँ वे संशोधन लाने के लिए अनुज्ञात नहीं किए गए थे, क्या वे अब अनुज्ञात किए जाएंगे। इसलिए यह इस तरह हो रहा है- प्रवर समिति के सदस्यों का दोष नहीं है।
डॉ. अम्बेडकर : मैं दोष नहीं दे रहा हूँ।
पंडित ठाकुरदास भार्गव : इन परिस्थितियों के अंतर्गत मैं डॉ. अंबेडकर से अनुरोध करूंगा कि वे कृपया इसे छोड़ दें। यह विधेयक महत्वपूर्ण नहीं है- यह अपेक्षित नहीं है...................।
डॉ. अम्बेडकर : मैं हर उस विधेयक को देने के लिए तैयार हूँ जो मेरे नाम में है।
पंडित ठाकुरदास भार्गव : मैं सुझाव दूंगा कि यह विधेयक छोड़ दिया जाए।
* माननीय उपाध्यक्ष : जहाँ तक नोटरी विधेयक वाली प्रवर समिति का संबंध है, माननीय सदस्य अपने नियंत्रण से परे कारणों से उपस्थित नहीं हो सके थे। उन्हें अन्य अनेक प्रवर समितियों में उपस्थित होना था और बैठक गणपूर्ति के अभाव में नहीं हो सकती। मैं माननीय मंत्री से इस दिशा में एक अन्य प्रयास करने का अनुरोध करूंगा।
डॉ. अम्बेडकर : मैं सदन के नियंत्रण में हूँ।
डॉ. टेकचन्द (पंजाब) : क्या मैं सुझाव दे सकता हूँ कि इस प्रवर समिति की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए समय 6 तारीख तक बढ़ाया जाए। समय आज समाप्त हो रहा है।
माननीय उपाध्यक्ष : मैं मौखिक प्रस्ताव पर ध्यान दूंगा। क्या सदन समय बढ़ाने के लिए सहर्ष तैयार है?
डॉ. टेकचन्द (पंजाब) : हम 4 या 5 तारीख को मिलेंगे और इस समय तक अन्य प्रवर समितियाँ अपना कार्य समाप्त कर लेंगी। यह केवल आधे घंटे का काम है। अतः मैं समय के विस्तार के लिए सुझाव दे रहा हूँ।
माननीय उपाध्यक्ष : क्या माननीय मंत्री समय के विस्तार के प्रस्ताव से सहमत हैं।
डॉ. अम्बेडकर : मुझे कोई आपत्ति नहीं है।
* संसदीय वाद-विवाद, खड-14, भाग- II, 28 सितंबर, 1951, पृ. 3619-21, 25 सितंबर, 1951, पृ. 3277-79