40. प्रवर समिति की बैठकें - Page 89

72 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

माननीय उपाध्यक्ष : मैंने सोचा था कि माननीय मंत्री, जो विधेयक के प्रायोजक

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हैं, प्रस्ताव लाएंगे।

डॉ. अम्बेडकर : इस प्रक्रम पर मेरे लिए यह कठिन मामला है। यदि सदन प्रवर समिति नियुक्त करता है तो सरकार अवश्य ही अध्युपाय को लागू करने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी।

माननीय उपाध्यक्ष : इस सदन की विचित्र परिस्थितियों पर विचार करते हुए

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सदन प्रवर समिति को कार्यमुक्त करने के पक्ष में प्रतीत नहीं होता और सदस्यों में से एक माननीय सदस्य ने समय बढ़ाने के लिए मौखिक प्रस्ताव किया है। मैं चाहूँगा कि यह प्रस्ताव स्वयं माननीय मंत्री द्वारा रखा जाए।

डॉ. अम्बेडकर : मैं नहीं जानता कि क्या मैं ऐसा कर सकता हूँ। किसी प्रस्ताव को लाना मेरा काम नहीं है।

माननीय उपाध्यक्ष : वे विधेयक के प्रायोजक हैं। इसलिए उन्हें प्रस्ताव रखना

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है। एक मिनट। समय आज समाप्त नहीं होता है। प्रवर समिति पहली तारीख तक रिपोर्ट दे सकती है। अतः सम्यक अनुक्रम में माननीय मंत्री 6 तारीख तक समय का विस्तार करने के लिए प्रसताव रख सकते हैं। अब उन्हें यह ज्ञात है कि सदन सामान्यतः प्रवर समिति को चालू रखने के पक्ष में है। इससे यह विशिष्ट मामला निपट जाता है?

जहाँ तक अन्य मामलों का संबंध है, मैं माननीय सदस्यों से नियम 70 को निर्दिष्ट करने के लिए कहूँगा। यह सच है कि माननीय सदस्य अनेक प्रवर समितियों में हैं और प्रातःकालीन और सायंकालीन सत्रों में प्रवर समितियों को सदन में रहना होगा। जब सदन सत्र में है। नियम 70 कहता है कि प्रवर समितियाँ बैठक कर सकती हैं जब सदन सत्र में है परंतु शर्त यह है कि मत विभाजन की घंटी बजने पर समिति का अध्यक्ष ऐसे समय के लिए, जो उसकी राय में विभाजन पर सदस्य को मत देने के लिए सक्षम बनाए, समिति की कार्यवाहियों को निलंबित करेगा। मैं समझता हूँ यही परिपाटी हाउस ऑफ कॉमन्स में भी है। माननीय सदस्य प्रवर समितियों को अनेक मामले निर्दिष्ट करना चाहते हैं। एक ओर यह इच्छा है और दूसरी ओर यह कहने की इच्छा है, ‘‘हमें प्रवर समिति में बुलाया जाता है।’’ कल की मेरी टिप्पणियाँ उन माननीय सदस्यों को लागू नहीं होती थीं जो प्रवर समिति के संबंध में दूर थे। प्रवर समिति का कार्य उतना ही अच्छा है जितना इस संसद में कार्य। जहाँ तक