84 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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शर्त संख्या
सेवाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व
दलित वर्ग ने उच्च जाति के अधिकारियों, के द्वारा जिन्होंने कानून का उल्लंघन करके अथवा दलित वर्गों की हानि के लिए और न्याय, समानता अथवा शुद्ध अंतःकरण का ध्यान रखे किए बिना उच्च जातियों के फायदे के लिए उसे प्रशासित करने में, उनमें निहित विवेकाधिकार के दुरूपयोग से अत्यधिक कष्ट भोगा है। इस गलती से केवल लोक सेवाओं में हिंदू जाति के एकाधिकार को समाप्त करके और ऐसे तरीके से उनकी भर्ती को विनियमित करके कि दलित वर्गों सहित सभी समुदायों का पर्याप्त हिस्सा हो, बचा जा सकता है। इस प्रयोजन के लिए दलित वर्गों को संवैधानिक कानून के भाग के रूप में कानूनी अधिनियमन हेतु निम्नलिखित प्रस्ताव देने होंगे :
(1) भारत में और भारत कें प्रत्येक प्रांत में लोक सेवाओं की भर्ती और नियंत्रण के लिए लोक सेवा आयोग स्थापित किया जाएगा।
(2) लोक सेवा आयोग के किसी सदस्य को विधानमंडल द्वारा पारित संकल्प को छोड़कर हटाया नहीं जाएगा और न ही उसकी सेवानिवृत्ति के बाद सम्राट के अधीन किसी पद पर नियुक्त किया जाएगा।
(3) ऐसी क्षमता परीक्षाओं के जो विहित की जाएं के अधीन रहते हुए लोक सेवा आयोग का निम्नलिखित कर्त्तव्य होगा :
(क) ऐसी रीति से सेवा में भर्ती करना, जिससे सभी समुदायों का सम्यक्
और पर्याप्त प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा, और
(ख) किसी संबंधित विशिष्ट सेवा में विभिन्न समुदायों के मौजूदा
प्रतिनिधित्व की मात्रा के अनुसार रोजगार में समय-समय पर
प्राथमिकता विनियमित करना।
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शर्त संख्या
विद्वेषपूर्ण कार्रवाई अथवा हितों की अवहेलना के विरूद्ध प्रतितोषण
इस तथ्य के दृष्टिगत कि भविष्य का बहुसंख्यक शासन रूढि़वादियों का शासन होगा, दलित वर्गों को भय है कि ऐसा बहुसंख्यक शासन उनके लिए सहानुभूतिपूर्ण नहीं होगा और उनके हितों को हानि तथा उनकी महत्वपूर्ण आवश्यकताओं की अवहेलना की संभाव्यता की अनदेखी नहीं की जा सकती। विशेषकर इसके विरुद्ध