खण्ड - III अछूतों को भारत के राजनीतिक क्षितिज पर लाने और भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला रखने में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की भूमिका - Page 105

88 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

उपाय करना मंत्री का कर्त्तव्य होगा।’’

‘‘4. गवर्नर जनरल के लिए निम्नलिखित विधिपूर्ण होगा :-

(क) मंत्री को शिक्षा, सफाई आदि से संबंधित किसी अधिनियमन से उत्पन्न

दलित वर्गों के कल्याण के संबंध में सभी अथवा कोई शक्ति या कर्त्तव्य

अंतरित करना।

(ख) मंत्री के प्राधिकार के अधीन और उनके समन्वय में कार्य करने के लिए

प्रत्येक प्रांत में दलित वर्ग कल्याण ब्यूरो नियुक्त करना।’’

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शर्त संख्या
दलित वर्ग और मंत्रिमंडल

जैसे कि यह आवश्यक है कि दलित वर्गों के पास विधानमंडल में सीट द्वारा, सरकारी कार्रवाई को प्रभावित करने की शक्ति होनी चाहिए वैसे ही यह भी वांछनीय है कि दलित वर्गों को सरकार की सामान्य नीति तैयार करने का अवसर मिलना चाहिए। यह वे तभी कर सकते हैं जब वे मंत्रिमंडल में सीट पा लेंगे। इसलिए दलित वर्ग दावा करते हैं कि अन्य अल्पसंख्यकों के साथ साझा रूप में मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व किए गए उनके नैतिक अधिकारों को मान्यता दी जानी चाहिए। इस प्रयोजन के दृष्टिगत दलित वर्ग प्रस्ताव करते हैं कि अनुदेशों की लिखत में अपने मंत्रिमंडल में दलित वर्गों का प्रतिनिधित्व प्राप्त करने का प्रयास करने के लिए गवर्नर और गवर्नर जनरल पर एक बाध्यता सौंपी जाएगी।‘‘ ख्1,

डॉ. अम्बेडकर ने मूल अधिकारों की इस घोषणा की कुछ प्रतियां भारत में अपने अनुयायियों को प्रेषित की, दलित वर्ग के प्रतिनिधियों द्वारा अल्पसंख्यक उप-समिति को प्रस्तुत मांगों के समर्थन में विभिन्न नगरों में बैठकें आयोजित करने के लिए कहा और यह कहते हुए कि वे मांगें दलित वर्गों की इच्छापूर्ण सहयोग के लिए सर्वथा न्यूनतम हैं, संकल्प की प्रतियां रामसे मैकडोनाल्ड को भेजने का अनुदेश दिया, अन्यथा वे स्व-शासन के लिए किसी संविधान को सहमति नहीं देंगे। तदनुसार, भारत के सभी भागों से ब्रिटिश प्रधान मंत्री के कार्यालय में कई तार पहुंचे।‘‘ ख्1,

इसी प्रकार, मुसलमानों, दलित वर्गों, भारतीय ईसाइयों, एंग्लो-इंडियन तथा यूरोपीय लोगों द्वारा संयुक्त ज्ञापन के रूप में तैयार सांप्रदायिक समस्या के निपटारे

  1. उप-समिति संख्या 3 (अलसंख्यक) की कार्यवाहियां; पृष्ठ 168-176 ।