खण्ड - III अछूतों को भारत के राजनीतिक क्षितिज पर लाने और भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला रखने में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की भूमिका - Page 116

99

भारतीय राजनीतिक चिंतन को गोल मेल सम्मेलन के इस सत्र का उल्लेखनीय योगदान संयुक्त भारत की संकल्पना का क्रमिक विकास था। एक दूसरा ठोस परिणाम भारत के राजनीतिक परिदृश्य में दलित वर्गों का निश्चित प्रादुर्भाव था और इससे अधिक महत्वपूर्ण विश्व मत के समक्ष डॉ. अम्बेडकर द्वारा उनकी असह्य दशा का भरपूर और हृदयस्पर्शी प्रतिपादन था। उन सीटों के प्रश्न पर जिन्हें प्रस्तावित विधानमंडल में विभिन्न समुदायों द्वारा प्राप्त करने की मांग की गई थी, और चुनाव की इस प्रणाली पर कि क्या आरक्षित सीटों के साथ पृथक अथवा संयुक्त मतदाताओं का प्रयोग किया जाना चाहिए, असहमति के कारण सम्मेलन स्थगित कर दिया गया था। इसके अतिरिक्त, यह अवश्य विचार किया जाना चाहिए कि उस समय कोई महत्वपूर्ण निर्णय लेना मेजबान के बिना गणना करने के समान था; क्योंकि भारत की मुख्य राजनीतिक पार्टी कांग्रेस ने कार्यवाहियों में भाग नहीं लिया था। डॉ. अम्बेडकर दिनांक 13 फरवरी, 1931 को मर्सीलिस पर सवार होकर भारत के लिए रवाना हुए।’’ ख्1,

^n fy r
o x
l afo èk ku
‘‘दलित वर्ग और भावी संविधान

डॉ. बी.आर. अम्बेडकर, शुक्रवार दिनांक 27 फरवरी, 1931 को प्रातःकाल बंबई पहुंचे, उनका अम्बेडकर सेवा दल के बटालियन द्वारा बेलार्ड पियर में उत्साहपूर्ण स्वागत किया गया। ‘‘दि टाइम्स आफ इंडिया’’ के प्रतिनिधि द्वारा साक्षात्कार लिए जाने पर उन्होंने निम्नलिखित बयान दिया : ‘‘मेरे विचार से गोल मेज सम्मेलन कूटनीतिज्ञता की अपूर्व सफलता थी। यह कहना एक निष्क्रिय दिखावा होगा कि सम्मेलन द्वारा यथा रेखांकित संविधान में कोई त्रुटि नहीं है, किन्तु मेरी राय में वे तात्विक प्रकृति की नहीं हैं। यहां तक कि विपरीत रूप से सत्य का अनुमान लगाते हुए उन सभी के लिए अभी भी समय और अवसर है, जो संरचना तैयार करने और सुधारने के लिए भारतीय समस्या के शांतिपूर्ण समाधान में विश्वास करते हैं। मेरी सबसे बड़ी निराशा इस तथ्य से उत्पन्न होती है कि सम्मेलन द्वारा यथा रेखांकित संविधान सर्वाधिक अप्रजातांत्रिक है क्योंकि यह बहुत प्रतिबंधित मताधिकार पर आधारित है। यह अत्यधिक खेद का विषय है कि सम्मेलन के परिणामों पर अपनी उद्घोषणाओं की रिपोर्ट पर निर्णय लेते हुए श्री गांधी संविधान के इस पहलू पर नजर डालना संपूर्ण रूप से भूल गए प्रतीत होते हैं और उन अवयवों पर बल डाल रहे हैं, जो मैं सोचता हूं सर्वाधिक नगण्य और सर्वाधिक अस्थायी हैं। हममें से जिन्होंने दलित वर्गों और श्रमिकों का प्रतिनिधित्व किया, उन्होंने वयस्क मताधिकार के लिए लड़ाई लड़ी और

  1. कीर, पृष्ठ 154-157 ।