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प्रजातंत्र के लिए उनकी निर्भीक हिमायत ने ब्रिटिशों को एक विरोध प्रदान किया था। परंतु इस बार उन्हें संघीय संरचना समिति में जो महत्वपूर्ण रूप से भारत के लिए नए संविधान के प्रारूपण से जुड़ी थी, चुना गया है।
भारत और यहां तक कि इंग्लैंड से भी सभी लोगों ने डॉ. अम्बेडकर पर बधाईयों की बौछार लगा दी। विरोधी खेमे के समाचार-पत्रों ने भी उनकी देशभक्ति, प्रजातंत्र के लिए उनके प्रेम और आम आदमी के कल्याण के लिए उनकी चिन्ता की सराहना प्रारंभ कर दी। एक प्रख्यात जिला समाचार-पत्र ने भी ‘‘कोलाबा समाचार’’, जो सामाजिक सुधारों के मामले में उनके प्रति उग्र था, चिरनेर मुकदमें में देश को प्रदान की गई उनकी देशभक्तिपूर्ण सेवा के लिए डॉ. अम्बेडकर का आभार व्यक्त किया। उसने साइमन कमीशन के दौरे के समय और गोल मेज सम्मेलन के प्रथम सत्र में उनके द्वारा प्रदान की गई सेवाओं का स्मरण किया, और उसने आगे वर्णन किया कि डॉ. अम्बेडकर एक सच्चे देशभक्त हैं और वे देश की बेडि़यों को तोड़ने के लिए लडेगे और गोल मेज सम्मेलन के दूसरे सत्र में अन्य को ऐसा करने में सहायता करेंगे।’’ ख्1,
‘‘दि इंडियन डेली मेल’’ ने अपने दिनांक 21 जुलाई, 1931 के संस्करण में संघीय संरचना समिति में उनके नामांकन पर डॉक्टर को बधाई देते हुए डॉ. अम्बेडकर की उल्लासपूर्ण प्रशंसा की।
उसने लिखा था : ‘‘मैं डॉ. अम्बेडकर को उनके आमंत्रण पर बधाई देता हूँ। डॉ. अम्बेडकर ने गोल मेज सम्मेलन में अभूतपूर्व प्रभाव डाला और उद्घाटन सत्र में उनका भाषण संपूर्ण सम्मेलन के दौरान दिए गए प्रभावशाली भाषणों में सर्वोत्तम था। सैंकी रिपोर्ट के प्रति उनका अंतिम दृष्टिकोण ऐसा था, जो अनुमोदित नहीं करते है किन्तु जो विरोध भी नहीं करता है’’। उन्होंने इंगित किया कि उन्हें यह देखने का अधिदेश था कि कोई उत्तरदायी सरकार स्थापित न हो जब तक कि वास्तव में एक प्रातिनिधिक सरकार नहीं बनती। उन्होंने भय व्यक्त किया कि सरकार का प्रस्तावित स्वरूप वर्गों द्वारा सर्वसाधारण के लिए होगा और उनके विरोध को ग्रेट ब्रिटेन के श्रमिक और उदारवादी पार्टी में अत्यधिक सहानुभूति प्राप्त हुई। दूसरी ओर डॉ. अम्बेडकर पुराने किस्म के अल्पसंख्यकों का खेल नहीं खेलेंगे। वे देशभक्त हैं और वे स्व-शासन प्राप्त करने में अतीव दिलचस्पी रखते हैं। भावी विचार-विमर्शों में, जो सीनेट और संघीय सभा के मताधिकार के चारों ओर केंद्रित होंगे, दलित वर्ग के इस प्रतिभावान प्रतिनिधि की निश्चित रूप से सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका होगी।’’ ख्2,
1.2. कीर, पृष्ठ 163 ।पुनःमुद्रित गणवीर, अम्बेडकर-गांधी : तीन मुलाकाती (मराठी) पृष्ठ 6-7 ।