102 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
‘‘दि संडे क्रॉनिकल’’ ने दिनांक 26 जुलाई, 1931 के अपने अंक में एक सच्चे राष्ट्रवादी के रूप में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की सेवाओं की सराहना करते हुए ए.टी.टी. आद्यक्षर के अधीन कहा : ‘‘संघीय संरचना समिति में नामित प्रतिनिधियों में से एक मेरे मित्र डॉ. अम्बेडकर हैं। जब वे आर.टी.सी. में भाग लेने के लिए पिछले वर्ष लंदन में थे तो मैंने उन्हें भली प्रकार देखा था। मन से एक सच्चे राष्ट्रवादी उन्हें ब्रिटिश कट्टरपंथियों, जो उन्हें अपने पक्ष में लाने के लिए चिंतित थे, की प्रत्ययकारी नखरेबाजी के विरुद्ध सख्त लड़ाई लड़नी थी और इसके साथ ही उनका कार्य राष्ट्रवादी पक्ष के भीतर उनके साथ प्रतिनिधि राव बहादुर श्रीनिवासन को बनाए रखने की उनकी चिंता द्वारा अधिक कठिन बना दिया गया था। चेस्टरफील्ड गार्डन में बार-बार उन्होंने शिकायत की कि सर तेज बहादुर आदान-प्रदान की प्रक्रिया में राजकुमारों को अधिक अधिमानता दे रहे हैं। परंतु उन्होंने स्वीकार किया कि सर तेज को बहुत कठिन स्थिति से होकर गुजरना पड़ा है।’’ ख्1,
दि केसरी और कई अन्य समाचारपत्रों ने डॉ. अम्बेडकर के नामांकन पर संतोष व्यक्त किया। डॉक्टर और एन. एम. जोशी को बधाई देते हुए सर्वेंट्स ऑफ इंडिया सोसायटी की पत्रिका ने अवलोकन किया : ‘‘समाज के साधारण वर्ग से आने वाले एक श्रमिक वर्गों का और दूसरा दलित वर्गों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वे ‘‘उच्च राजनीति’’ के लिए आवश्यक रूप से अपरिचित हैं जैसाकि उन्हें इस देश में समझा जाता है। उन्हें सीधे-सादे लोगों का साधारण विश्वास प्राप्त है, जिनके हितों का उन्होंने समर्थन किया है और उन्हें उन कतिपय सिद्धांतों, जिन्हें अकाट्य बनाए रखना उन्हें सिखाया गया है, पर बल देने से उनके आसपास के प्रख्यात व्यक्तियों द्वारा नहीं रोका जाएगा। इसके कुछ देर पूर्व बंबई में एक अग्रणी राष्ट्रवादी दैनिक ‘‘फ्री प्रेस जर्नल’’ के लंदन प्रतिनिधि ने सुश्री मायो को अपने उत्तर में उन सेवाओं की प्रशंसा की थी, जिन्हें डॉ. अम्बेडकर ने गोल मेज सम्मेलन के प्रथम सत्र में प्रदान किया था और कहा कि डॉ. अम्बेडकर एक निर्भीक, स्वतंत्र और देशप्रेम विचारधारा के नेता हैं, जिनकी निर्भीकता हिंदुओं और मुसलमानों दोनों को असहनीय है और यह कि गोल मेज सम्मेलन के प्रथम सत्र में उनका उद्घाटन भाषण सम्मेलन की संपूर्ण कार्यवाही में सर्वोत्तम भाषण था।’’
अभी तक यह निर्णय नहीं लिया गया था कि क्या गांधी गोल मेज सम्मेलन में भाग लेंगे या नहीं। स्वाभाविक रूप से गांधी की मंच कला और राजनीति कला द्वारा सृजित रहस्यमयी सुविधा के कारण बंबई में मालाबार हिल में मणिभवन पर सभी आंखे केंद्रित थीं। दौड़-धूप और जल्दबाजी में गांधी अपनी मांगों के बारे में अम्बेडकर को जानकारी देना चाहते थे। इसलिए गांधी ने अम्बेडकर को सूचित
- तदैव,पृष्ठ 7-8