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करते हुए दिनांक 6 अगस्त, 1931 को पत्र लिखा कि वे उस रात आठ बजे उन्हें देखने आएंगे अगर डॉ. अम्बेडकर कुछ समय दे सकें। गांधी ने आगे कहा कि वे प्रसन्नतापूर्वक डॉ. अम्बेडकर के निवास-स्थान पर आएंगे अगर उनके पास आना डॉ. अम्बेडकर के लिए सुविधाजनक हो।’’ ख्1,
तद्नुसार, अम्बेडकर और गाँधी के बीच दिनांक 14 अगस्त, 1931 को 2 बजे अपराह्न में मणिभवन में मुलाकात हुई।
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दलित वर्ग के नेता डॉ. अम्बेडकर ने जिन्होंने गोल मेज सम्मेलन में भाग लेने के लिए ‘‘मुल्तान’’ जहाज से रवाना होने के पूर्व श्री गांधी से मुलाकात की थी। कथित रूप से महात्मा को अछूतों की शिकायतों के प्रति कांग्रेस की कपटपूर्ण प्रवृत्ति के बारे में सच्चाई बताई। असमर्थ और असहाय महात्मा क्या कर सकते हैं जब संपूर्ण देश छूआछूत में विश्वास करता है?’’ ख्2,
अगला दिन शनिवार 15 अगस्त, 1931 था। गोल मेज सम्मेलन के लगभग सभी प्रतिनिधियों को ‘‘एस. एस. मुल्तान’’ जहाज से लंदन के लिए रवाना होना था। उस दिन बंबई के बेलार्ड पियर में नयनाभिराम दृश्य था। पियर में राज प्रमुखों से निर्धनों तक सभी किस्म के लोग उपस्थित थे। मित्र, प्रशंसक, अनुयायी सभी अपने राज प्रमुखों और हीरो के प्रति शुभ यात्रा व्यक्त करने के लिए जमा हुए थे। डॉ. अम्बेडकर एक नेता थे, जिसका कार से उतरते ही अत्यधिक अभिवादन ओर उत्साहपूर्ण स्वागत हुआ। बाहर सड़क पर दो हजार से अधिक कार्यकर्ता जमा हुए थे और उन्होंने मोले स्टेशन पर पहुंचते ही ‘‘डॉ. अम्बेडकर की जय’’ और ‘‘डॉ. अम्बेडकर अमर रहे’’ के उद्घोष से उनका स्वागत किया।’’ ख्3,
जहाज पर डॉ. अम्बेडकर की मुलाकात सर प्रभाशंकर पट्टनी से हुई। उन्होंने गाँधी से उनके साक्षात्कार के परिणाम के बारे में पूछा। सर प्रभाशंकर ने डॉ. अम्बेडकर से कहा कि चूंकि वह साक्षात्कार के मध्य से ही हॉल से चले गए थे इसलिए उन्हें उसके परिणाम या अंत की जानकारी नहीं है। डॉ. अम्बेडकर ने जिन्हें सामंत की वाणी में उद्भुत स्तर से संकेत मिला, उनसे पूछा कि वे क्यों बीच में हॉल छोड़कर चले गए थे। सामंत ने तीखे स्वर में कहा कि हिन्दू धर्मग्रंथों के अनुसार एक सम्य व्यक्ति को वह स्थान छोड़ देना चाहिए, जहां निंदक किसी अच्छे व्यक्ति की निंदा
- 2.3. कीर, पृष्ठ 163-64‘दि टाइम्स आफ इंडिया, दिनांक 18 अगस्त, 1931 ।कीर पृष्ठ 168-169 ।