खण्ड - III अछूतों को भारत के राजनीतिक क्षितिज पर लाने और भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला रखने में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की भूमिका - Page 121

104 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

करता हो, अगर सुनने वाला उस स्थान पर निंदक की जुबान नहीं रोक सकता। डॉ. अम्बेडकर ने सामंत के बढ़ते हुए संवेदनशून्य क्रोध से प्रसन्न होते हुए और अपने चेहरे पर चिड़चिड़ाहट लाए बिना उनसे पूछा कि पाखंडी और एक दीन-हीन व्यक्ति के लिए पट्टनी के हिन्दू धर्मग्रंथों द्वारा क्या सजा निर्धारित की गई है। इस कथन को सुनकर पट्टनी उग्र हो गए और उन्होंने डॉ. अम्बेडकर से पूछा कि इस क्रूर आक्रमण से उनका क्या अभिप्राय है। डॉ. अम्बेडकर ने उत्तर दिया कि उनका वही अभिप्राय है जिसे सामंत ने समझा है, और आगे कहा कि गाँधी को उनके ऐसे दीन-हीन व्यक्ति के शिकंजे से मुक्त किया जाना चाहिए। पुलिस कमिश्नर, विल्सन ने हस्तक्षेप किया और आगे की घटना को रोक दिया। सामंत ने अवश्य ही एक अधिक बुद्धिमान व्यक्ति को छोड़ा होगा। वास्तव में, विश्व कम लाभान्वित नहीं होगा अगर उसके सभी महान व्यक्ति अंतर्दर्शी हो जाएं और उनके चारों ओर के लोगों के बेकार के कार्यों से स्वयं को मुक्त कर लें।

सरोजिनी नायडू और मालवीय को भी उसी स्टीमर से जाना था, लेकिन उन्होंने अपनी यात्रा रद्द कर दी, क्योंकि गांधी ने अपनी रवानगी के बारे में कोई फैसला नहीं लिया था। डॉ. अम्बेडकर ने स्टीमर पर दिए साक्षात्कार के दौरान गांधी द्वारा गोल मेज सम्मेलन में भाग न लेने का जिक्र किया और कहा कि बरदोली के हितों को भारत के हितों से ऊपर रखना गलती की पराकाष्ठा है, ‘‘छोटी-मोटी शिकायतों की चिंता करना और उस बड़ी समस्या की अनदेखी करना जिसे हल करके वे संबंधित अधिकारियों पर अपना नियंत्रण स्थापित कर सकते हैं, कुछ ऐसा है जो मेरी समझ से बाहर है।’’

अब अम्बेडकर अपनी मांगों पर गांधी द्वारा विरोधात्मक निर्णय के बारे में गहराई से सोचने लगे। अतः उन्होंने अपने सचिव की मार्फत भारत के लोगों को यह संदेश भिजवाया कि उनके दावों के प्रति गांधी के रवैये का विरोध करने के लिए सभाओं का आयोजन करें। स्वेज़ से उन्होंने शिवतारकर को एक और पत्र लिखा और यह कहा कि गोल मेज सम्मेलन के प्रथम सत्र की अल्पसंख्यक उप-समिति को उनके द्वारा प्रस्तुत ज्ञापन की प्रतियां भेजें। उन्होंने उनसे यह भी कहा कि उनका चमड़े का जो बैग वहां रह गया है उसे राव बहादुर आर. श्रीनिवासन के हाथ भिजवा दें।

स्टीमर पर रीवा के महाराजा जयकर और अन्य नेताओं ने दलित वर्गों के समता सेवा दल के आक्रामक दृष्टिकोण पर अपना संतोष व्यक्त किया। शौकत अली प्रसन्न थे, डा. मुंजे खुश थे और उन्होंने इस बारे में अपना छिपा हर्ष व्यक्त किया कि हिन्दू महासभा द्वारा इतना अनुशासित स्वयंसेवक दल का गठन न कर पाने के बावजूद मुसलमान स्वयंसेवकों का सामना करने के लिए अछूत हिन्दुओं का