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एक संगठन है। मुंजे ने डा. अम्बेडकर को उन अछूतों का नेता होने पर बधाई भी दी जो यह भलीभांति जानते है कि डा. अम्बेडकर उनके निमित्त सेवारत है। उन्होंने यह भी कहा कि अपने संरक्षकों से अनभिज्ञ सवर्ण हिन्दू वर्ग की भांति दलित वर्ग उदासीन और कृतघ्न नहीं है।
29 अगस्त को लंदन पहुंचने पर डा. अम्बेडकर फ्लू से पीडि़त थे और कै तथा अतिसार से बुरी तरह से त्रस्त थे। उनकी बीमारी ने उनकी ऊर्जा को इस हद तक समाप्त कर दिया था उन्होंने शिवतारकर को लिखा कि उनका स्वास्थ्य संकटावस्था के कगार पर है। सोमवार 7 सितम्बर से वे कुछ ठीक महसूस करने लगे थे लेकिन कमजोरी अपनी जगह बनी हुई थी। वे शिवतारकर को निरंतर यह सलाह देते रहे कि उनकी बीमारी के बारे में उनकी पत्नी को न बताएं। एक बात हमेशा उनके दिमाग पर जोर मारती रही। महाद उप-न्यायाधीश की अदालत में मुकदमा हारने के बाद, रूढि़वादी हिन्दुओं ने ठाणे स्थित जिला अदालत में अपील दायर की थी और ठाणे की जिला अदालत का फैसला अभी होना था। उन्होंने शिवतारकर से कहा कि अदालत का फैसला आने पर उन्हें सूचित करें।
इस बीच, गांधी, वल्लभभाई पटेल, जवाहर लाल नेहरू और सर प्रभाशंकर पट्टनी शिमला में वायसराय से मिले तथा उन्होंने सभी मतभेद समाप्त कर दिए। गांधी बंबई के लिए रवाना हो गए, ताकि लंदन जाने के लिए प्रथम उपलब्ध स्टीमर पकड़ सकें। सरोजनी नायडू, पंडित मालवीय और उनके दल के साथ गांधी इंग्लैंड के लिए 29 अगस्त को रवाना हुए तथा 12 सितम्बर, 1931 को लंदन पहुंच गए।
गोल मेज सम्मेलन का दूसरा सत्र 7 सितम्बर, 1931 को प्रारंभ हुआ। इस बार, सर मोहम्मद इकबाल, मुसलिम लीग अध्यक्ष; डा. एस.के. दत्ता, ईसाइयों के प्रतिनिधि; जी. डी. बिड़ला, बड़े पूंजीपति; पंडित मालवीय, एक सनातनी सुधारक; सरोजनी नायडू, नाइटंगेल ऑफ इंडिया; और सर अली इमाम जैसे कुछ और प्रतिनिधियों को शामिल करके सम्मेलन के सहभागियों की संख्या में वृद्धि की गई थी। रहस्मय व्यक्तित्व वाले गांधी की उपस्थिति इस सत्र की विशिष्ट विशेषता थी। गोल मेज सम्मेलन का पहला सत्र ‘‘हैमलेट’’ था जिसमें डेनमार्क का राजकुमार नहीं था।
सम्मेलन प्रारंभ होने से कुछ पहले, ब्रिटेन ने एक परिवर्तन किया। श्रमिक सरकार का स्थान एक राष्ट्रीय सरकार ने ले लिया था, प्रधान मंत्री रामसे मैकडोनल्ड पहले की भांति कमान संभाले हुए थे। भारत के लिए गृह मंत्री बेजबुड बेन का स्थान सैम्युल हौरे ने ले लिया था। चर्चिल जैसे रूढि़वादी नेताओं ने भारत को सत्ता के प्रस्तावित हस्तांतरण का पुरजोर विरोध किया था।