खण्ड - III अछूतों को भारत के राजनीतिक क्षितिज पर लाने और भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला रखने में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की भूमिका - Page 126

109

डॉ. अम्बेडकर के बीच एक बैठक सरोजिनी नायडू के घर पर 9 से 12 बजे के दौरान तय की। तद्नुसार, डॉ. अम्बेडकर ने गाँधी से मुलाकात में अपनी बात उनके समक्ष रखी। लेकिन गाँधी ने अपने मन की बात नहीं बताई और सिर्फ इतना कहा कि अगर दूसरे लोग डॉ. अम्बेडकर की मांग से सहमत होंगे तो वे भी मान जाएंगे।

अल्पसंख्यक समिति की पहली बैठक 28 सितम्बर, 1931 को हुई। प्रधान मंत्री ने माना कि भारत के अल्पसंख्यकों की समस्या से सभी घबरा गए हैं। उन्होंने कहा कि कुछ प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया है कि सरकार को मध्यस्थता करनी चाहिए, क्योंकि वे स्वयं कोई फैसला कर पाने में असमर्थ रहे हैं, लेकिन उनकी राय थी कि उनमें से कुछ को संभवतः मध्यस्थता स्वीकार्य न हो। इस पर आगा खान ने कहा कि महात्मा गांधी रात को मुस्लिम प्रतिनिधियों से मिलेंगे इसलिए उन्होंने स्थगन हेतु अनुरोध किया। साथ ही, आगा खान का समर्थन करते हुए, मालवीय ने इच्छा व्यक्त की कि सामान्य चर्चा स्थगित की जाए।

डॉ. अम्बेडकर को हिन्दू-मुस्लिम समझौते के बारे में मुस्लिम नेताओं और गांधी के बीच चल रही गुप्त वार्ता की जानकारी थी। अतः, स्थगन प्रस्ताव का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि, ‘‘जहां तक दलित वर्गों का संबंध है, हमने पिछली बार अल्पसंख्यक उप-समिति के समक्ष अपनी बात रख दी थी। विभिन्न विधायिकाओं में हम जितनी मात्रा में प्रतिनिधित्व चाहते हैं, उसके बारे में मैं एक संक्षिप्त विवरण अब इस समिति के समक्ष प्रस्तुत करना चाहता हूँ।’’

डॉ. अम्बेडकर ने आगे कहा कि उन्होंने स्वयं अत्यंत प्रसन्नता के साथ यह सुना कि साम्प्रदायिक मुद्दे को हल करने के लिए आगे बातचीत चल रही है। उन्होंने यह भी कहा कि, ‘‘लेकिन मैं प्रारंभ में ही इस मुद्दे को एकदम स्पष्ट कर देना चाहता हूं। जो बातचीत कर रहे हैं उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि वे दूत बिल्कुल भी नहीं हैं, यह कि श्री गाँधी या कांग्रेस के लोगों का प्रतिनिधित्व-चरित्र कुछ भी हो, लेकिन निश्चय ही वे हमें बांध सकने की स्थिति में नहीं हैं - निश्चित रूप से नहीं। मैं इस बात को इस बैठक में बलपूर्वक रखता हूं।’’ एक चेतावनी के साथ अपने भाषण को समाप्त करते हुए उन्होंने कहा कि, ‘‘मैं बलपूर्वक कहना चाहूंगा कि जो कोई भी भार डालने का दावा करेगा और जो कोई भी भार डालने का इच्छुक है, उसे ऐसा नहीं करना चाहिए - वह ऐसा नहीं कर सकता - मेरे हिस्से में से।’’ इस पर अध्यक्ष मैकडोनाल्ड ने कहा, ‘‘डॉ. अम्बेडकर ने अपने सामान्य बढि़या अन्दाज़ में स्थिति को बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने भ्रम की कोई स्थिति नहीं छोड़ी है। *

* संघीय संरचनात्मक समिति और अल्पसंख्यक समिति की कार्यवाही, पृष्ठ 527 ।