खण्ड - III अछूतों को भारत के राजनीतिक क्षितिज पर लाने और भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला रखने में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की भूमिका - Page 128

111

थी और यह कि वे लगभग सभी उन दलों या समूहों के निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं थे जिन्होंने यह मान लिया गया था कि वे उनका प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और न ही ये वे लोग थे जिनकी उपस्थिति एक सर्वसम्मत समझौते के लिए नितांत आवश्यक थी। अतः उन्होंने बैठक को अनिश्चित काल के लिए स्थगित करने का अनुरोध किया। डॉ. अम्बेडकर ने चुनौती को स्वीकार किया और गांधी को जवाब देने के लिए खड़े हो गए। उन्होंने कहा कि गांधी उस समझौते के उल्लंघन के दोषी हैं जिसके अंतर्गत गत रात्रि यह सहमति हुई थी कि किसी भी प्रतिनिधि को कोई ऐसा भाषण नहीं देना है, या कोई ऐसी टिप्पणी नहीं करनी है जिससे रोष उत्पन्न हो।

डॉ. अम्बेडकर का कटु भाषण और कटु होता चला गया। उन्होंने गर्जना की, ‘‘श्री गाँधी को सुनने के बाद मुझे इस बात ने क्षुब्ध किया है कि अल्पसंख्यक समिति को अनिश्चित काल के लिए स्थगित करने के अपने प्रस्ताव तक सीमित रहने के बजाए उन्होंने अलग-अलग समुदायों के उन प्रतिनिधियों पर टिप्पणी करना प्रारंभ कर दिया जो इस मेज के सभी ओर बैठे हैं। उन्होंने कहा कि वे प्रतिनिधि सरकार द्वारा नामित व्यक्ति हैं और वे अपने उन संबंधित समुदायों के विचारों का प्रतिनिधित्व नहीं करते जिनके लिए वे संघर्षरत रहे हैं। हम इस आरोप का खंडन नहीं कर सकते कि हम सरकार द्वारा नामित व्यक्ति हैं, लेकिन अपने बारे में मुझे यही कहना है कि मुझे इस बारे में तनिक भी संदेह नहीं है कि यदि भारत के दलित वर्गों को इस सम्मेलन के लिए अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करने का अवसर मिलता तब भी मुझे आप लोग यहीं पाते। अतः मुझे यही कहना है कि भले ही मैं नामजद होऊं या नहीं, मैं अपने समुदाय के दावों का पूर्णरूपेण प्रतिनिधित्व करता हूं। इस बारे में किसी भी व्यक्ति को कोई भ्रम नहीं होना चाहिए।’’

डॉ. अम्बेडकर ने आगे कहा कि महात्मा दावा करते हैं कि कांग्रेस मुझसे या मेरे साथियों से भी अधिक दलित वर्गों के साथ रही है। इस दावे के संबंध में मात्र यही कह सकता हूँ कि यह कई झूठे दावों में से एक है जो गैर-जिम्मेदार लोग करते ही रहते हैं, भले ही इन दावों से जुड़े व्यक्ति इसका सदैव खंडन करते रहें। * इस पर डॉ. अम्बेडकर ने भारत के दूरतम अछूत कोने से उनके दृष्टिकोण का समर्थन करने वाले तार दिखाएं। ये तार उन स्थानों से आए हैं जहां वे कभी नहीं गए और उन लोगों से प्राप्त हुए हैं जिनसे वे कभी नहीं मिले हैं। इसके बाद उन्होंने समिति से कहा कि या तो समिति इस समस्या को हल करे या ब्रिटिश सरकार इसका हल ढूंढे। उन्होंने घोर निराशा और भय से कहा कि दलित वर्ग वर्तमान परिस्थितियों में सत्ता के हस्तांतरण के बारे में चिंतित नहीं है, यदि सरकार सत्ता का हस्तांतरण चाहती हैं

* संघीय संरचनात्मक समिति और अल्पसंख्यक समिति की कार्यवाही।