112 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
तो ऐसा उन शर्तों और उन उपबंधों के तहत किया जाना चाहिए जिनसे सत्ता एक गुट के हाथ में, एक गुटतंत्र के हाथ में, या ऐसे लोगों के एक समूह के हाथ में न चली जाए जो या तो हिन्दू हैं या फिर मुसलमान हैं। समाधान ऐसा होना चाहिए कि सत्ता में सभी समुदायों की भागीदारी क्रमशः उनके अनुपात में होनी चाहिए।
प्रधान मंत्री ने प्रतिनिधियों से अपील की कि वे अपने चुनाव की किसी पद्धति या फिर अपनी व्यक्तिगत खामियों के कारणों को दोष न दे। उन्होंने उनसे कहा कि वे तथ्यों का सामना करें, और उनसे पूछा कि भारत में समस्या है या नहीं। प्रधान मंत्री के भाषण का लहजा कुछ तीखा था और कुछ ने इसे कृतघ्नतापूर्ण बताया जो गांधी के प्रति कटुता से परिपूर्ण था।
डॉ. अम्बेडकर का जोरदार प्रचार यहीं नहीं रूका। उन्होंने 12 अक्तूबर को लंदन से टाइम्स आफ इंडिया को एक पत्र लिखा जिसमें संपूर्ण घटनाचक्र पर रोशनी डाली गई थी। उन्होंने लिखा कि ‘‘हमें विश्वस्त रूप से पता चला है कि हमारे मुस्लिम मित्रों के साथ बातचीत के दौरान श्री गांधी ने मांग की कि उनकी चौदह सूत्री मांगों को मानने के लिए एक शर्त यह भी थी कि उन्हें दलित वर्गों और अपेक्षाकृत छोटे अल्पसंख्यकों की मांगों का विरोध करना होगा।’’ डॉ. अम्बेडकर ने तीव्र निष्ठुरता से कहा कि, ‘लोगों के समक्ष कहने के लिए, यदि अन्य सभी सहमत हैं तो मैं भी सहमत हो जाऊंगा, और फिर व्यक्तिगत जीवन में अकेले ही कार्य करने के लिए निकल पडूंगा ताकि उन लोगों को सहमत होने से रोका जा सके जो बिकने के बाद सहमत होने के इच्छुक हैं, जो हमारी राय में एक महात्मा के लिए आशोभनीय आचरण है, और जिसकी अपेक्षा दलित वर्गों के कट्टर विरोधी से ही की जा सकती है। श्री गाँधी दलित वर्गों के मित्र की भूमिका का ही निर्वाह नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे एक ईमानदार शत्रु की भूमिका का भी निर्वाह नहीं कर रहे हैं’।
डॉ. अम्बेडकर ने अपने घर भेजे गए एक पत्र में यह पहले से ही बता दिया था कि गोल मेज सम्मेलन की समाप्ति असफलता में होगी और उनकी राय में इस असफलता के लिए गांधी जिम्मेदार होंगे। डॉ. अम्बेडकर के अनुसार, गाँधी का पक्षपात, अल्पसंख्यकों की समस्या को हल करने में विभेदकारी आचरण, व्यवहार में अविश्वसनीय भूमिका, अन्य प्रतिनिधियों के प्रति उनकी पूर्ण उपेक्षा, उनका अपमान इन सभी तत्वों ने इस समस्या को व्यावहारिक ढंग से हल करने में गांधी की मदद नहीं की। डॉ. अम्बेडकर ने आगे कहा कि गाँधी द्वारा एक समुदाय का दूसरे समुदाय से क्रूर खिलवाड़ कराना अब काफी स्पष्ट हो गया है। डा. अम्बेडकर ने यह कह कर अपनी बात समाप्त की कि गाँधी की अलोकतांत्रिक मानसिक संरचना ने हैरल्ड लस्की जैसे लोगों