114 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
जोखिम पर अपने परिचित और संबंधियों को उनके नागरिक एवं धार्मिक अधिकारों से वंचित न करें। जैसा कि गत सत्याग्रह के दौरान किया गया था, जब कलाराम मंदिर के द्वार बंद कर दिए गए थे।
डॉ. अम्बेडकर को अपने लोगों से सवर्ण हिन्दू जाति के लोगों के व्यवहार का पर्दाफाश करने में जो समर्थन मिला था, उससे वे प्रसन्न थे। उन्होंने लंदन से अपने लोगों को एक संदेश भेजा। *
नासिक सत्याग्रह का आयोजन बेजोड़ उत्साह और दृढ़ संकल्प से किया गया था। बड़े-बड़े जलसे किए गए और जुलूस निकाले गए। अनेक स्वयंसेवक नेता गिरफ्तार हुए। उन्होंने बहादुरी से गिरफ्तारियां दीं और जेल गए। लंदन टाइम्स में इन गिरफ्तारियों और सत्याग्रह के बारे में छपी खबर ने डॉ. अम्बेडकर के वक्तव्य को मजबूती प्रदान की।
गाँधी से झड़प के बाद, डॉ. अम्बेडकर ने वित्तीय प्रणाली पर आयोजित चर्चा में भाग लिया जिसकी रूपरेखा संघ सरकार के लिए उप-समिति ने प्रस्तुत की थी। उन्होंने संघीय न्यायालय के गठन के बारे में एक अत्यधिक विचारोतेजक तथा व्याख्यात्मक भाषण दिया जिसमें जिन्ना, जयकर, लार्ड सैंके और लार्ड लोथियान ने भी बहुत रुचि दिखाई तथा डॉ. अम्बेडकर से उनके कुछ बिन्दुओं पर स्पष्टीकरण देने को कहा गया।
इस भारी कार्य के बावजूद, डॉ. अम्बेडकर निजी साक्षात्कार और स्पष्टीकरण देने, वक्तव्य तथा प्रति वक्तव्य देने एवं गोल मेज सम्मेलन के दौरान अपने रुख के समर्थन में लंदन के विभिन्न संस्थानों में भाषण देने में अत्यंत व्यस्त थे। अंतर्राष्ट्रीय कार्य संस्थान में उनका भाषण गाँधी के मंच को ध्वस्त करने में बहुत प्रभावी रहा। दलित वर्गों की मांगों के प्रति गाँधी के विरोध से दुविधा में पड़े लोग डॉ. अम्बेडकर के पास गए और उनसे उनके रुख पर स्पष्टीकरण मांगा। मिस मुरिएल लेस्टर, जिनके पास गांधी ठहरे हुए थे, डॉ. अम्बेडकर से मिलीं और डॉ. अम्बेडकर ने अपना दृष्टिकोण उनके समक्ष रखा। अम्बेडकर और गाँधी के एक साझे मित्र ने दोनों नेताओं को चाय पर आमंत्रित किया तथा उन दोनों के बीच सामंजस्य बैठाने का प्रयास किया। अम्बेडकर ने माना कि गाँधी ने अपने मानवीय अंदाज में अछूतों के उन्नयन हेतु कार्य किया है तथा यह कि वे अस्पृश्यता को समाप्त करने के लिए प्रत्यनशील हैं, लेकिन मूलतः इस प्रश्न पर उनकी राय मेल नहीं खाती।
* इस भाग का पृष्ठ 192-193 देखिए ।