खण्ड - III अछूतों को भारत के राजनीतिक क्षितिज पर लाने और भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला रखने में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की भूमिका - Page 138

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समझ लिया और निस्संदेह गैर-सरकारी ढंग से यथा संभव अधिक से अधिक प्रचार भी करा दिया। निस्संदेह, तेज बहादुर सप्रू और जयकर जैसे उदारवादी राजनेताओं को जब इन वार्तालाप का पता चला तब वे बहुत क्रोधित हुए और उनकी गाँधी से जोरदार लड़ाई भी हुई। मुझे बताया गया है कि श्री जयकर कांग्रेस के दूत से विशेष रूप से असभ्य हो गए थे, और यह बताया गया है कि गाँधी ने क्रोध से यह उत्तर दिया कि वे जो कुछ भी। करने के लिए स्वतंत्र हैं और यह कि उन्हें पूरा विश्वास है कि जो कुछ भी उन्हें अच्छा लगेगा उसके लिए वे कांग्रेस को सहमत करा लेंगे। लेकिन जब मामला लीक होकर प्रेस के पास पहुंचा तो निस्संदेह गांधी ने इस गुप्त समझौते से बच निकलने के लिए सभी प्रयास किए क्योंकि तब तक सरकार ने उस शर्त को नहीं माना था जो इस समझौते का आंतरिक हिस्सा थी। यदि आप गांधी द्वारा इस विषय पर ‘न्यूज़ क्रानिकल’ को दिए गए विशेष साक्षात्कार को पढ़ेगें तो आप काफी संतुष्ट हो जाएंगे कि गाँधी ने ‘‘स्वतंत्रता’’ की तत्काल स्थापना के बारे में अपनी इच्छा व्यक्त करते हुए - जिसका अर्थ ब्रिटेन के साथ साझेदारी और भारत के साथ साम्राज्यवादी संबंध बनाए रखना है - उन्होंने भारत में एक संघीय संविधान को तत्काल लागू करने में आने वाली बड़ी कठिनाइयों को अव्यक्त रूप से अधिक और सुस्पष्ट रूप से स्वीकार करते हुए व्यावहारिक रूप से हार मान ली।’ ख्1,

‘‘डॉ. बी. आर. अम्बेडकर लंदन से रवाना हुए और 15 जनवरी, 1932 को मारसेलीस जहाज से चलकर 29 जनवरी को बम्बई पहुंच गए।

डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने मताधिकार समिति द्वारा जारी प्रश्नावली के उत्तर का एक सेट तैयार किया और इसकी प्रतियां अलग-अलग सदस्यों तथा दलित वर्ग समुदाय के कुकुरमुत्ता संघों को परिचालित कीं। प्रत्येक पैराग्राफ के प्रारंभ में

खाली स्थान छोड़ा गया ताकि वहां पर संघ या अलग-अलग व्यक्तियों के नाम लिखे जा सकें।

Col1 Col2 Col3 Col4 Col5 Col6

परिचालित प्रश्नावली के सैंकड़ों घिसे-पिटे उत्तर पुनरावृत्ति मात्र थे।

‘‘दि .........................(संघ का नाम भरने के लिए खाली स्थान) की यह राय है कि दलित वर्गों को आम चुनावों में प्रतिनिधित्व नहीं मिल सकता। उन्हें अपनी पसंद का प्रतिनिधित्व कम ही मिलेगा, भले ही मताधिकार प्राप्त हो। कारण इस प्रकार हैं :

  1. गणबीर, अम्बेडकर, गांधी : तीन मुलाकाती, पृष्ठ 22-23 ।