122 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
‘‘(क) प्रत्येक प्रादेशिक निर्वाचन-क्षेत्र में दलित वर्गों की जनसंख्या अल्प है और
चुनाव में अल्पसंख्यक मतदाता रहेंगे और अपने लिए एक सीट जीत पाने
के लिए उनकी संख्या बहुत कम रहेगी।’’
‘‘(ख) सामाजिक पूर्वाग्रहों के कारण, ऊंची जाति का कोई भी मतदाता दलित
वर्ग के उम्मीदवारों के पक्ष में अपना मत नहीं देगा।’’
‘‘(ग) दूसरी ओर, ऊंची जातियों पर आर्थिक निर्भरता और ऊंचे वर्गों के मतदाताओं
के धार्मिक तथा सामाजिक प्रभाव के कारण, मतदाताओं को अपने वर्ग
के उम्मीदवार को वोट देने के बजाए उच्च जाति के उम्मीदवारों को
वोट देने के लिए प्रेरित किया जा सकता है। उच्च जाति के समर्थन
से दलित वर्ग का कोई भी व्यक्ति परिषद के लिए कभी भी निर्वाचित
नहीं हुआ है।’’ ख्1,
लार्ड लेथियान की अध्यक्षता वाली मताधिकार समिति की कार्यवाही में भाग लेने के लिए, डॉ. अम्बेडकर दिल्ली के लिए तुरंत रवाना हो गए। दिल्ली के रास्ते में, दलित वर्गों ने उनका प्रत्येक स्टेशन पर गर्मजोशी से स्वागत किया, नासिक, इगनपुरी, देवलाली, मनमाड, भुसावल और झांसी स्टेशनों पर आयोजित रंगारंग कार्यक्रम विशेष रूप से भव्य थे।
फरवरी के प्रारंभिक दिनों में मताधिकार समिति बिहार गई। दलित वर्गों ने डा. अम्बेडकर का प्रत्येक स्थान पर पूरे जोश के साथ अभिनन्दन किया। इसके बाद समिति ने पटना होते हुए कलकत्ता के लिए प्रस्थान किया। मताधिकार समिति के समक्ष साक्ष्य देते हुए, डॉ. अम्बेडकर के समझाने पर दलित वर्गों के नेताओं ने अलग निर्वाचकमंडल की स्कीम का समर्थन किया क्योंकि उनको डर था कि आरक्षित सीटों वाली संयुक्त निर्वाचकमंडला प्रणाली में दलित वर्गों के उम्मीदवार बहुमत निर्वाचकमंडल की दया पर होंगे, और उनका मत हासिल करने के लिए उन्हें अपने पूर्वाग्रहों पर विचार करना होगा, या फिर इस बात की पूरी-पूरी संभावना होगी कि बहुमत समुदाय की कठपुतलियां सीटों पर कब्जा कर लें। दलित वर्गों के अनेक नेताओं ने यह पाया कि अगर संयुक्त निर्वाचकमंडल की प्रणाली को सफलतापूर्वक काम करना है तो बहुमत समुदाय की ओर से यह पहले से मानी गई विशाल उदारता थी। उनका मत था कि उस समय ऐसा अनुकूल वातावरण विद्यमान नहीं है।’’ ख्2,
1.2. दि बम्बई क्रॉनिक्ल, 23 फरवरी, 1932 ।ः कीर, पृष्ठ 194-95 ।