124 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
करेंगे। मैंने मताधिकार प्रश्नावली के विस्तृत उत्तर लिख लिए हैं। इनके टाइप होते ही, एक प्रति मैं आपको भिजवा दूंगा।’’
‘‘मैं प्रश्नावली के अपने उत्तरों का एक विवरण आपके प्रयोग हेतु और पुनरीक्षित प्रश्नावली आपको भेज रहा हूँ। आप देखेंगे कि साम्प्रदायिक प्रश्न को बिल्कुल हटा दिया गया है।’’ ख्1,
‘‘अब डा. अम्बेडकर के समक्ष एक और समस्या थी। आरक्षित सीटों और संयुक्त निर्वाचकमंडल के आधार पर डॉ. मुंजे ने एम.सी. राजा से एक समझौता कर लिया था। राजा ने तार द्वारा ब्रिटिश प्रधान मंत्री को अपना ज्ञापन भिजवाया जिसमें डॉ. मुंजे के साथ हुए समझौते के ब्यौरे निहित थे। इस समझौते ने डॉ. अम्बेडकर को तकलीफदेह स्थिति में डाल दिया था। यह स्मरण कराया जाता है कि राजा वही व्यक्ति हैं जिन्होंने डॉ. अम्बेडकर को केवल भेज कर यह कहते हुए अलग निर्वाचकगण प्रणाली की मांग का समर्थन किया था कि गांधी अपने शत्रुओं से परिचित नहीं हैं और इसीलिए संयुक्त निर्वाचकमंडल प्रणाली को उन्होंने अनिच्छुक दलित वर्गों के गले जबरन बांधने का प्रयास किया है। मूलतः, राजा की पार्टी आरक्षित सीटों पर संयुक्त निर्वाचकमंडल प्रणाली के पक्ष में थी। लेकिन उन्होंने पक्ष बदल लिया। केंद्रीय सभा में राजा ही एकमात्र दलित वर्ग के सदस्य थे और उन्हें गोल मेज सम्मेलन के लिए आमंत्रित नहीं किया गया था। शायद गोल मेज सम्मेलन के लिए निमंत्रण न मिलने की चूक से दुखी होकर, और इससे भी अधिक गांधी द्वारा दलित वर्गों का प्रतिनिधित्व करने के घोषित दावे से अत्यधिक व्याकुल होकर उन्होंने संयुक्त निर्वाचकमंडल प्रणाली के विचार को त्यागकर पृथक निर्वाचकमंडल प्रणाली का समर्थन किया और अब अपनी मूल मांग पर लौट आए हैं।’’ ख्2,
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श्री गवई ने दलित वर्गों के सदस्यों को निम्नलिखित विवरण पहले ही जारी कर दिया था। आपको कतिपय भ्रामक जानकारी यह भेजी जा रही है कि भारतीय मताधिकार समिति उन अलग-अलग व्यक्तियों या संघों के साथ निर्वाचकमंडल प्रणाली के प्रश्न पर चर्चा नहीं कर सकती जो दलित वर्गों की ओर से इसे ज्ञापन प्रस्तुत करते हैं। यह बहुत भ्रामक है। समिति द्वारा भिजवाई गई प्रश्नावली में पेपर 2 में ‘‘दलित वर्गों का प्रतिनिधित्व मद के अंतर्गत यह स्पष्ट रूप से बताया गया है कि 1.2. दि बम्बई क्रानिक्ल दिनांक 7 अप्रैल, 1932 ।कीर, पृष्ठ 195-196 ।