खण्ड - III अछूतों को भारत के राजनीतिक क्षितिज पर लाने और भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला रखने में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की भूमिका - Page 142

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विधायिका में समुदाय का प्रतिनिधित्व हासिल करने के लिए किसी को कौन-कौन से विशिष्ट प्रस्ताव करने होंगे।

वे मॉडल उत्तर

‘‘इसके अलावा, मेरा सुझाव है कि हमारे संघों को यह अच्छी सलाह दी जाए कि अपने प्रांत के बारे में अपने विचार भेजें भले ही अन्यों द्वारा तैयार किए गए मॉडल उत्तर कुछ भी हों। प्रधान मंत्री द्वारा 1 दिसम्बर, 1931 को भारतीय संविधान में भावी परिवर्तनों की घोषणा के मद्देनजर, प्रांतों को संपूर्ण प्रांतीय स्वायत्तता दी जाएगी। यह बहुत आवश्यक है कि हमारा समुदाय समय के साथ स्वयं को बदले और इसलिए प्रधान मंत्री के जिस बयान का ऊपर हवाला दिया गया है उससे पहले हमने जो निर्णय लिया था उस पर फिर से विचार करें।’’ ख्1,

‘‘मताधिकार समिति की बैठक वाइसरीगल लॉज में हुई। डॉ. अम्बेडकर ने दलित वर्गों की ओर से अनुरोध किया कि भारतीय दंड संहिता में या भावी संविधान में दलित वर्गों के विरुद्ध उकसाने या उनके बहिष्कार को बढ़ावा देने के लिए दंड का प्रावधान किया जाए, क्येंकि ऐसे कृत्यों से दलित वर्गों को अपने मूल अधिकारों का

खुलेपन से प्रयोग करने में अड़चन आती है। मताधिकार समिति ने इस सुझाव को मान लिया।

जब राजा मुंजे समझौते का समाचार बाहर आया तब बंगाल और असम के दलित वर्गों के नेताओं ने आरक्षित सीटों के लिए संयुक्त निर्वाचकमंडल की प्रणाली के पक्ष में हो जाने के लिए राजा की निंदा की तथा डॉ. अम्बेडकर की मांगों का समर्थन किया। एम. बी. मलिक, एम. एल. ए., अध्यक्ष, बंगाल दलित वर्ग संघ; अध्यक्ष यू. पी. आदी हिन्दू संघ, अध्यक्ष; अखिल असम दलित वर्ग संघ; अध्यक्ष, आदि धर्म मंडल, पंजाब; अध्यक्ष, दलित वर्ग सहायता सोसायटी, दिल्ली; सभी ने राजा की निंदा की और डॉ. अम्बेडकर की मांगों का समर्थन किया।’’

अप्रैल, 1932 में, नासिक सत्याग्रह ने तीसरे चरण में प्रवेश किया और इसके नेताओं भाऊराव गायकवाड़ और रणखम्बे को गिरफ्तार किया गया। उनकी गिरफ्तारी की खबर उसी दिन अर्थात् 14 अप्रैल, 1932 को तार द्वारा भेजी गई थी। मताधिकार समिति के हिन्दू सदस्यों चिन्तामणि, बाखले और ताम्बे द्वारा अलग निर्वाचकमंडल प्रणाली के लिए दलित वर्गों की मांग का अत्यधिक विरोध करने से उनके तथा डॉ. अम्बेडकर के बीच शत्रुता हो गई थी। यहां तक कि वे डॉ. अम्बेडकर से बात भी

  1. दि बंबई क्रानिक्ल, दिनांक 27 फरवरी, 1932 ।