129
कोई बाधा नहीं आनी चाहिए, और यह कि वे एक अनन्तिम स्कीम को स्वयं तैयार करके तथा लागू करके इस बाधा को दूर कर देंगे।
गत 19 मार्च को महामहिम सम्राट की सरकार को यह सूचित किया गया कि समुदायों द्वारा कोई समझौता कर पाने में निरंतर असफलता के कारण नया संविधान बनाने की दिशा में बाधा आ रही है। उन्होंने कहा कि उत्पन्न होने वाले कठिन और विवादास्पद प्रश्नों की ध्यानपूर्वक पुनः जांच कर रहे हैं, अब उनकी इस बारे में संतुष्टि हो गई है कि नए संविधान के अंतर्गत अल्पसंख्यकों की हैसियत से जुड़ी समस्याओं के कम से कम कुछ पहलुओं पर विनिश्चय दिए बगैर संविधान का निर्माण करने की दिशा में आगे कोई प्रगति नहीं हो सकती।
महामहिम सम्राट की सरकार ने तद्नुसार फैसला किया कि यथा समय संसद में प्रस्तुत किए जाने वाले भारतीय संविधान से जुड़े प्रस्तावों में नीचे निर्धारित स्कीम को कार्यान्वित करने के लिए वे उपबंध शामिल करेंगे। इस स्कीम के दायरे को प्रांतीय विधायिकाओं में ब्रिटिश भारतीय समुदायों के प्रतिनिधित्व के लिए व्यवस्था करने तक सीमित रखा गया है, केंद्रीय विधायिका में प्रतिनिधित्व के प्रश्न पर विचार करने की प्रक्रिया को नीचे पैराग्राफ 20 में दिए गए कारणों के मद्देनजर स्थगित किया जा रहा है। इस स्कीम के दायरे को सीमित रखने के विनिश्चय का भावार्थ यह हुआ कि यह समझने में कोई बाधा नहीं होगी कि संविधान के निर्माण के लिए अल्पसंख्यकों की अन्य अनेक अति महत्वपूर्ण समस्याओं के बारे में फैसला करना आवश्यक होगा। लेकिन यह निर्णय इस उम्मीद के साथ लिया गया है कि प्रतिनिधित्व की प्रक्रिया और अनुपात के मूलभूत प्रश्नों के बारे में अपना मत घोषित करने के बाद, ये समुदाय उन अन्य साम्प्रदायिक समस्याओं के बारे में स्वयं कोई समझौता कर पाने की स्थिति में आ पाएंगे, जिनकी अभी तक अपेक्षित जांच नहीं हुई है।
महामहिम सम्राट की सरकार चाहती है कि यह स्पष्ट रूप से समझ लिया जाए कि उनके फैसले का पुरीक्षण करने की दृष्टि से प्रारंभ की जाने वाली किसी भी बातचीत में वे किसी पक्षकार की भूमिका नहीं अदा करेंगे, और यह कि हम ऐसे किसी भी प्रतिनिधित्व के बारे में कोई विचार करने हेतु तत्पर नहीं होंगे, जिसका लक्ष्य इसमें उपान्तर करना हो और जिसे सभी प्रभावित दलों का समर्थन प्राप्त न हो। लेकिन वे सहर्ष होने वाले किसी भी सहमत समझौते पर अपनी स्वीकृति देने के सर्वाधिक इच्छुक हैं। अतः, यदि एक नये भारत शासन अधिनियम को एक कानून के रूप में पारित होने से पहले, उनका इस बारे में समाधान हो जाता है कि संबंधित समुदाय स्कीम के व्यावहारिक विकल्प के बारे में परस्पर सहमत हो गए हैं, या तो एक अथवा अधिक गवर्नर प्रांतों के संबंध में या फिर संपूर्ण ब्रिटिश भारत के संबंध