खण्ड - III अछूतों को भारत के राजनीतिक क्षितिज पर लाने और भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला रखने में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की भूमिका - Page 147

130 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

में वे संसद को यह सिफारिश करने के लिए तैयार रहेंगे कि अब जिन उपबंधों की रूपरेखा तैयार की गई है उनके अनुकल्प प्रतिस्थापित किए जाने चाहिएं।

  1. ‘‘दलित वर्ग’’ के वे सदस्य, जो मतदान के पात्र हैं, साधारण निर्वाचन-क्षेत्र में मतदान करेंगे। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि ये वर्ग काफी समय तक अपने दम पर विधायिका में संभवतः पर्याप्त प्रतिनिधित्व न मिल पाए, जैसा कि सारणी में दर्शाया गया है। इन सीटों को उन विशेष निर्वाचन-क्षेत्रों से चुनाव द्वारा भरा जाएगा जिनमें केवल ‘‘दलित वर्गों’ के निर्वाचकीय पात्र सदस्य मतदान के हकदार होंगे। एक ऐसे विशेष निर्वाचन-क्षेत्र में यदि कोई व्यक्ति मतदान करता है तो जैसा कि ऊपर बताया गया है, वह साधारण निर्वाचन-क्षेत्र में मतदान का भी हकदार होगा। मंशा यह है कि इन निर्वाचन क्षेत्रों का सृजन उन चुनिंदा क्षेत्रों में किया जाए जहां दलित वर्गों की संख्या अधिक हो, और यह कि मद्रास को छोड़कर वे प्रांत के समूचे क्षेत्र तक विस्तारित नहीं होंगे।

ऐसा संभव लगता है कि बंगाल में कुछ साधारण निर्वाचन-क्षेत्रों में, अधिकांश मतदाता दलित वर्गों के होंगे। तदनुसार, आगे की जांच-पड़ताल पूरी होने तक उस प्रांत के दलित वर्ग के विशेष निर्वाचन-क्षेत्र से सदस्यों को लाने के लिए कोई संख्या नियत नहीं की गई है। मंशा यह है कि दलित वर्गों को बंगाल विधायिका में कम से कम 10 से कम सीटें मिलें।

दलित वर्गों के विशेष निर्वाचन-क्षेत्रों में मतदान के हकदार व्यक्तियों (यदि निर्वाचकीय पात्र हैं) की प्रत्येक प्रांत में सटीक परिभाषा को अभी अंतिम रूप से निर्धारित नहीं किया गया है। यह एक नियम के रूप में मताधिकार समिति की रिपोर्ट में समर्थित व्यापकता सिद्धांतों पर आधारित होगी। तथापि, उत्तर भारत के कुछ प्रांतों में उपान्तरण करना आवश्यक हो सकता है, क्योंकि जहां छूआछूत का सामान्य मापदंड लागू करने से प्रांत की विशेष परिस्थितियों के मद्देनजर परिभाषा कुछ हद तक अनुपयुक्त हो सकती है।’’

महामहिम सम्राट की सरकार यह नहीं समझती कि दलित वर्गों के इन विशेष निर्वाचन-क्षेत्रों की एक सीमित समय के बाद आवश्यकता पड़ेगी। उनकी मंशा है कि संविधान में यह व्यवस्था की जाए कि अगर इन्हें ऊपर पैरा 6 में उल्लिखित चुनाव सुधार के सामान्य अधिकारों के अंतर्गत पहले समाप्त नहीं किया जाता है ये 20 वर्ष बाद समाप्त हो जाएंगे।’’ ख्1,

  1. लेख और भाषण, खंड 9, पृष्ठ 79-82।