खण्ड - III अछूतों को भारत के राजनीतिक क्षितिज पर लाने और भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला रखने में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की भूमिका - Page 148

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इस अधिनिर्णय के अनुसार, दलित वर्गों को प्रांतीय विधायिकाओं में अलग सीटें और दोहरे मतदान का अधिकार मंजूर किया गया था जिसके अंतर्गत उन्हें अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करना था तथा आम निर्वाचन-क्षेत्रों में मतदान करना था।

अपने आगमन के बाद, अगले दिन डॉ. अम्बेडकर ने सर सैम्युल होरे को एक अति महत्वपूर्ण पत्र लिखा जिसमें उनसे अधिनिर्णय के पैरा 9 के अंतिम भाग को स्पष्ट करने को कहा क्योंकि दलित वर्गों के कुछ सदस्यों के मन में इस बारे में कुछ भ्रम था। उन्होंने यह भी लिखा कि उनके लिए यह असंभव है कि दलित वर्गों को इस अधिनिर्णय को इसके साथ संलग्न परंतुक सहित, स्वीकार करने के लिए राजी करा लें, और यह लिखकर अपना पत्र समाप्त किया कि ‘‘आपका उत्तर मिलने तक मैं यह कोशिश करूंगा कि भारत के सभी भागों से दलित वर्गों का जो रोष मुझ पर फूट रहा है उसे थामे रखूं और जनता पर न फूटने दूं।’’1

डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने मंगलवार 23 अगस्त, 1932 को बंबई में साम्प्रदायिक अधिनिर्णय के बारे में निम्नलिखित बयान जारी किया :-

‘‘किसी ने भी यह आशा नहीं की थी कि साम्प्रदायिक अधिनिर्णय में हर किसी के लिए सब कुछ होगा और दलित वर्गों की ओर से मेरे तथा मेरे सहयोगी राव बहादुर श्रीनिवासन द्वारा प्रस्तुत किए गए प्रस्तावों में कुछ परिवर्तनों के लिए मैं स्वयं तैयार था। लेकिन साम्प्रदायिक अधिनिर्णय ने प्रांतीय विधायिकाओं में उनके प्रतिनिधित्व को निष्ठुरता से काफी महत्वपूर्ण अनुपात तक कम कर दिया है। इसका परिणाम यह हुआ कि साम्प्रदायिक अधिनिर्णय ने उन्हेंं पर्याप्त प्रतिनिधित्व से वंचित करके उनके लिए वास्तविक शिकायतें करने के अवसर पैदा कर दिए हैं।’’

’’मुझे इस अतिवाद में कोई औचित्य नजर नहीं आता। तथापि, मुझे पंजाब के दलित वर्गों को प्रतिनिधित्व के अधिकार से वंचित रखने के कारण बहुत अधिक सदमा पहुंचा है। इस राज्य में दलित वर्गों की स्थिति से मैं परिचित हूँ। अतः मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि यदि तुलनात्मक दृष्टि से देखा जाए तो उत्तर भारत के अन्य प्रांतों में दलित वर्गों की सामाजिक स्थिति से इस प्रांत के दलित वर्गों की सामाजिक स्थिति कहीं बेहतर है। विशेष प्रतिनिधित्व का उनका दावा सबसे मजबूत है।’’

‘‘इस सर्वाधिक पात्र वर्ग को अपनी सीट से वंचित करने के पीछे महामहिम सम्राट की सरकार के कारण कुछ भी रहा हो, मैं तब तक कुछ समझ नहीं पाऊंगा

  1. कीर, पृष्ठ 204।