खण्ड - III अछूतों को भारत के राजनीतिक क्षितिज पर लाने और भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला रखने में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की भूमिका - Page 152

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करने और महात्मा का जीवन बचाने के लिए करेंगे, तथा इस बारे में डॉ. अम्बेडकर को तार से सूचित किया। महात्मा के जीवन को बचाने के लिए यह आवश्यक था कि ब्रिटिश प्रधान मंत्री के अधिनिर्णय में परिवर्तन किया जाए और इसमें संशोधन करने के लिए यह अनिवार्य था कि डॉ. अम्बेडकर का अनुमोदन लिया जाए क्योंकि उन्होंने इन विशेषाधिकारों को दलित वर्गों के लिए छीना था। सहज ही, सभी की निगाहें डॉ. अम्बेडकर पर टिकी थीं, क्योंकि वही उस क्षण के नायक थे। यह भाग्य की क्रूर विडम्बना ही थी कि जिन नेताओं तथा प्रेस ने डॉ. अम्बेडकर को दलित वर्गों के नेता के रूप में पहचानने से इंकार कर दिया था वे अब दलित वर्गों के नेतृत्व एवं प्रवक्ता को पहचानने के लिए बाध्य थे। वे अब समूचे देश के मार्गदर्शक बन गए थे।

गांधी के आमरण अनशन के महत्व और उससे उत्पन्न संकट के विस्तार से डॉ. अम्बेडकर अवगत थे। गाँधी ने उन पर एक अत्यधिक खतरनाक एवं घातक हथियार से वार किया था। उन्होंने वार से बचने के लिए स्वयं को तैयार किया। उनकी बंबई के गवर्नर के साथ पूना में मुलाकात हुई।’’ ख्1,

पृथक निर्वाचकमंडल प्रणाली के समर्थन मैं डॉ. बी. आर. अम्बेडकर द्वारा बंबई के गवर्नर से मुलाकात करने के लिए रविवार सुबह बंबई से पूना के लिए प्रस्थान करने से, दलित वर्गों को पृथक निर्वाचनमंडल की योजना का त्याग करने और महात्मा गाँधी के प्राण बचाने के लिए आज बंबई में आयोजित सम्मेलन से एक दिन पहले शहर में अटकलों का बाजार गर्म था।

डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने प्रातः पूना के लिए प्रस्थान किया और बंबई के गवर्नर के साथ लंबी बातचीत करने के बाद शाम को बंबई लौट आए।

हमारे प्रतिनिधि ने पूछा, ‘‘क्या आप कल होने वाले सम्मेलन में भाग लेंगे?’’

इस प्रश्न के जवाब में डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि पंडित मालवीय से तार द्वारा मिले संदेश के अलावा उन्हें अब तक सम्मेलन में भाग लेने के लिए कोई औपचारिक निमंत्रण नहीं मिला है, लेकिन अगर उन्हें निमंत्रण मिलता है तो वे हर हाल में सम्मेलन में भाग लेंगे।

11 सितम्बर, 1932, मंगलवार की शाम को जारी एक बयान में डॉ. अम्बेडकर ने अपने इस विश्वास को दोहराया कि पृथक निर्वाचकमंडल दलित वर्गों के हित में है और यह फिर से कहा कि महात्मा गांधी पहले अपने प्रस्ताव रखें ताकि डॉ. उनका उत्तर दे सकें।’’ ख्2,

1.2. कीर, पृष्ठ 205-2016 ।द बोम्बे क्रानिकल, दिनांक 11 सितम्बर, 1932 (12 सितम्बर, 1932 का अंक हो सकता है -

सम्पादकगण)