खण्ड - III अछूतों को भारत के राजनीतिक क्षितिज पर लाने और भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला रखने में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की भूमिका - Page 154

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आज के समाचार-पत्र में मुझे यह पढ़कर आश्चर्य हुआ कि शहर के अलग-अलग हिस्सों में आपात समिति के तत्वावधान में कुछ आठ सार्वजनिक सभाओं का आयोजन हो रहा है ताकि एक संकल्प पारित करके जनता से यह कहा जाए कि वह ब्रिटिश सरकार को दलित वर्गों को प्रभावित करने वाली सीमा तक साम्प्रदायिक अधिनिर्णय के बारे में अपनी नीति में बदलाव लाने के लिए बाध्य करें। इस संकल्प का स्पष्ट उद्देश्य यह है कि दलित वर्गों के प्रतिनिधित्व के लिए प्रधान मंत्री के अधिनिर्णय में की गई विशेष व्यवस्था के खिलाफ आम राय कायम की जाए।

चूंकि महात्मा गांधी ने इस प्रश्न पर आत्म-दाह करने के अपने संकल्प की घोषणा कर दी है, कुछ जाने-माने हिन्दू नेताओं और मेरे बीच बातचीत का दौर जारी है, मुझे कल शाम आपात समिति की बैठक में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया था। मैं बैठक में उपस्थित हुआ। इस बैठक में मेरी उपस्थिति के दौरान ऐसे किसी कार्यक्रम का हवाला नहीं दिया गया। सार्वजनिक सभाओं में ऐसे किसी संकल्प को प्रस्तुत करने पर विचार हुआ हो। यदि कल की बैठक में संकल्प का मसौदा मेरे ध्यान में लाया जाता तो मैं इस संकल्प की शब्दावली पर ही निश्चित रूप से आपत्ति उठाता बल्कि पहले से चल रही बातचीत के परिणाम आने से पहले सार्वजनिक सभा का आयोजन करने के विचार पर ही एतराज जताता। वास्तव में, सहमति यह बनी थी कि कोई भी दल किसी भी किस्म का कोई प्रचार नहीं करेगा। मेरे दल के सदस्यों द्वारा बहुत अधिक दबाव डालने के बावजूद, इस सर्वसम्मति ने मुझे किसी सभा का आयोजन करने या साम्प्रदायिक अधिनिर्णय के पक्ष में कोई प्रचार करने से रोके रखा।

आपात समिति द्वारा आयोजित की जाने वाली ये प्रस्तावित सार्वजनिक सभाएं और इनमें प्रस्तुत किया जाने वाला संकल्प मेरे तथा मेरे दल के लिए मात्र एक उत्तेजक चुनौती है। जो मुझसे बातचीत कर रहे हैं वे मेरे विरुद्ध प्रचार नहीं कर सकते तथा साथ ही बातचीत के परिणाम के रूप में एक सौहार्दपूर्ण समझौते की आशा करते हैं। या तो बातचीत हो या फिर सीधे लड़ाईं। दोनों साथ-साथ नहीं चल सकते। यदि दूसरा पक्षकार प्रचार करने के अपने अधिकार पर बल देता है तो अगर मेरा दल भी उनके विरुद्ध प्रचार करने का कोई निर्णय लेता है तो उन्हें मुझे दोष देने का कोई हक नहीं है।

बी. आर. अम्बेडकर

बंबई, 18 सितम्बर, 1932’’ ख्1,

  1. 19 सितम्बर, 1932 का दि टाइम्स आफ इंडिया।