खण्ड - III अछूतों को भारत के राजनीतिक क्षितिज पर लाने और भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला रखने में डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की भूमिका - Page 165

148 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

मैं एक खलनायक की भूमिका का निर्वाह कर रहा हूं। मै अपने लोगों की न्यायोचित मांगों को मनवाने के लिए किसी भी सीमा तक नुकसान उठाने के लिए तैयार हूँ।

‘‘मैं आपको बताना चाहूंगा कि मैं अपने धर्मनिष्ठ कर्त्तव्य से कभी पीछे नहीं हटूंगा और अपने लोगों के न्यायसंगत और यथार्थ हितों के लिए कभी विश्वासघात नहीं करूंगा भले ही आप मुझे गली की नजदीकी बत्ती के खम्बे से टांग दो। आज हम जिस प्रश्न से रूबरू हो रहे हैं उसे भावनाओं में बहकर हल नहीं किया जा सकता बल्कि एक संवैधानिक रास्ता अपनाकर हल किया जा सकता है क्योंकि यह उन असंख्य भाईयों से जुड़ा हुआ है जो युगों से गुलामों का जीवन जी रहे हैं। अंतःकरण का पालन करने मात्र से यहां कोई लाभ नहीं मिलने वाला है। महात्मा गाँधी के प्रस्ताव के स्वरूप को यदि हम देखें तो इस पर सोच विचार करने के लिए कुछ और समय चाहिए। तथापि, यह सम्मेलन एक संकल्प के माध्यम से महात्मा गाँधी से यह अनुरोध करे कि वे अनशन को 10-12 दिनों के लिए टाल दें।’’

लेकिन अध्यक्ष, पंडित मदन मोहन मालवीय ने कहा कि यह किसी भी परिस्थिति में संभव नहीं है। इसके फलस्वरूप, डॉ. अम्बेडकर साम्प्रदायिक अधिनिर्णय का त्याग करने के लिए सहमत नहीं हुए।’’ ख्1,

‘‘इसके बाद सम्मेलन अगले दिन 21 सितम्बर को दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित हो गया। लेकिन तुरंत बाद सम्मेलन के प्रमुख नेता बिड़ला हाउस गए और वहां सर तेज बहादुर सप्रू ने आरक्षित सीटों के संबंध में प्राथमिक एवं माध्यमिक चुनाव की एक योजना प्रस्तुत की। इसके अनुसार, दलित वर्ग प्रत्येक सीट के लिए कम से कम तीन उम्मीदवारों के नामों की एक सूची का स्वयं चयन करेंगे और फिर चुने गए इन तीन उम्मीदवारों में से सवर्ण हिन्दू के संयुक्त निर्वाचकमंडल तथा दलित वर्ग एक का चयन करेंगे।’’ ख्2,

‘‘लंबे विचार-विमर्श के बाद, डॉ. अम्बेडकर ने कहा कि एक समझौता हो सकता है बशर्ते कि अधिनिर्णय के संबंध में अतिरिक्त रियायतें दी जाएं ताकि अधिनिर्णय का त्याग करने से होने वाली हानि की भरपाई की जा सके। कांग्रेस के प्रतिनिधियों ने आश्वासन दिया कि वे इस प्रस्ताव पर विचार करेंगे। पंडित मालवीय ने इस बारे में एक छोटी समिति का गठन करने का सुझाव दिया। तद्नुसार तेज बहादुर सप्रू, बैरिस्टर जयकर, पंडित मालवीय, मथुरादास वासनजी और डॉ. अम्बेडकर को शामिल करके एक समिति बनाई गई तथा इन नामों की सूचना सम्मेलन को दी गई। 1.2. जनता, दिनांक 1 अक्तूबर, 1932 । कीर, पृष्ठ 209 ।