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तदनुसार डॉ. अम्बेडकर ने एक मांग-पत्र तैयार किया और 20 सितम्बर, 1932 को रात 10 बजे बिड़ला भवन में समिति के समक्ष प्रस्तुत किया। इसका पाठ इस प्रकार है।’’ ख्1, :
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महात्मा गाँधी के अनशन से पूर्व तैयार किया गया मांग-पत्र
(क) दलित वर्ग को प्रांतीय विधायिकाओं में निम्नलिखित संख्या में सीटें मिलेंगी :-
अधिनिर्णय के अनुसार
मद्रास 215 में से 30 18 बंबई 200 में से 16 10 बंगाल 250 में से 50 10 पंजाब 175 में से 10 9 उत्तर प्रदेश 228 में से 40 12 बिहार और उड़ीसा 175 में से 20 7 सी.पी. और बेरार 112 में से 20 10 असम 108 में से 11 4
(ख) इन सीटों पर चुनाव की पद्धति संयुक्त निर्वाचकमंडल प्रणाली और आरक्षित सीट प्रणाली होगी, बशर्ते कि मद्रास में 18 एकल निर्वाचन-क्षेत्रों में, बंबई केंद्रीय प्रांतों तथा बंगाल में 10 एकल निर्वाचन-क्षेत्रों में, असम में 4 एकल निर्वाचन-क्षेत्रों में, बिहार एवं उड़ीसा में 7 एकल निर्वाचन-क्षेत्रों में, पंजाब में 5 एकल निर्वाचन-क्षेत्रों में और उत्तर प्रदेश में 12 एकल निर्वाचन-क्षेत्रों में पहले दस वषों के लिए आम चुनाव से पहले दलित वर्गों के मतदाताओं के लिए एक प्राथमिक चुनाव होगा जिसके माध्यम से वे व्यक्तियों का चुनाव करेंगे ताकि एक नामावली तैयार की जा सके जो बाद में संयुक्त निर्वाचकमंडल योजना में दलित वर्गों की ओर से चुनाव लड़ेंगे।
दस वर्ष बाद
(ग) पहले 10 वर्षों के बाद, प्राथमिक चुनाव की प्रणाली को समाप्त कर दिया जाएगा और बिना किसी अपवाद के सभी सीटें संयुक्त निर्वाचकमंडल प्रणाली तथा आरक्षित सीट प्रणाली के आधार पर प्रत्यक्ष चुनाव द्वारा पूर्ववत भरी जाएंगी।
- जनता, दिनांक 1 अक्तूबर, 1932 ।